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31 देश... 90 हजार सैनिक ... और दुनिया का 'सबसे बड़ा' युद्धाभ्यास, क्या तीसरा विश्वयुद्ध चाहता है NATO?

नाटो की ओर से कहा गया है कि इस युद्धाभ्यास में मालवाहक व विध्वंसक समेत 50 से ज्यादा विमान, 80 से ज्यादा लड़ाकू जेट, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, 133 टैंक, पैदल सेना ले जाने वाले 533 वाहन और करीब 1,100 लड़ाकू वाहन भाग ले रहे हैं.

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Naresh Chaudhary
NATO, Countries, war Drill, Third World War, world News

हाइलाइट्स

  • युद्धाभ्यास में शामिल हो रहे हैं हजारों लड़ाकू विमान, टैंक और हेलीकॉप्टर
  • नाटो की ताकत दिखाएगा ये युद्धाभ्यास, पूर्वी हिस्से पोलैंड पर खास जोर

NATO Want Third World War: नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) शीत युद्ध के बाद अपना सबसे बड़ा युद्ध अभ्यास शुरू करने जा रहा है. इस युद्ध के पीछे मंशा है कि अगर भविष्य में संघर्ष भड़कता है तो अमेरिकी सैनिक रूस की सीमा से लगे देशों और नाटो सदस्य देशों को कैसे मजबूत कर सकते हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस युद्धाभ्यास के शीर्ष कमांडर क्रिस कैवोली ने गुरुवार को कहा कि करीब 90,000 सैनिक स्टीडफास्ट डिफेंडर 2024 अभ्यास में शामिल हो रहे हैं, जो मई तक चलेगा.

युद्धाभ्यास में शामिल हो रहे हैं हजारों लड़ाकू विमान, टैंक और हेलीकॉप्टर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नाटो की ओर से कहा गया है कि इस युद्धाभ्यास में मालवाहक व विध्वंसक समेत 50 से ज्यादा विमान, 80 से ज्यादा लड़ाकू जेट, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, 133 टैंक, पैदल सेना ले जाने वाले 533 वाहन और करीब 1,100 लड़ाकू वाहन भाग लेंगे. कमांडर कैवोली ने कहा कि अभ्यास में नाटो की ओर से अपनी क्षेत्रीय योजनाओं को अंजाम देने का पूर्वाभ्यास किया जाएगा. 31 देशों का यह गठबंधन दशकों बाद एक साथ युद्ध के अभ्यास की तैयारी कर रहा है. बताया गया है कि रूसी हमले का जवाब देने के लिए भी ये अभ्यास किया जा रहा है. 

नाटो की ताकत दिखाएगा ये युद्धाभ्यास

हालांकि नाटो की ओर से जारी बयान में अभी तक रूस का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन इसका शीर्ष रणनीतिक दस्तावेज रूस को नाटो सदस्यों की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष खतरे के रूप में इंगित कर रहा है. नाटो की ओर से कहा गया है कि स्टीडफास्ट डिफेंडर 2024 यूरोप की रक्षा को मजबूत करने के लिए उत्तरी अमेरिका और सहयोगी देशों के अन्य हिस्सों से तेजी से सेना तैनात करने की नाटो की क्षमता का दिखाएगा. 

पहले भी दो बार हो चुके हैं बड़े युद्धाभ्यास

कैवोली ने राष्ट्रीय रक्षा प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक के बाद ब्रुसेल्स में एक प्रेसमीट की. इसमें कहा गया है कि समकक्ष देशों के साथ उभरे प्रतिद्वंद्वियों के संघर्षों को देखते हुए ये कदम उठाया गया है. नाटो के अनुसार इसी तरह का युद्ध अभ्यास साल 1988 में शीत युद्ध के दौरान 125,000 सैनिकों के साथ रिफॉर्गर और साल 2018 में 50,000 सैनिकों के साथ ट्राइडेंट जंक्चर हुआ था. अभ्यास में भाग लेने वाले सैनिक, जिसमें यूरोप में कर्मियों को लाने के साथ-साथ जमीन पर अभ्यास करना भी शामिल होगा, नाटो देशों और स्वीडन से आएंगे, जो जल्द ही गठबंधन में शामिल होंगे. 

नाटो के पूर्वी हिस्से में क्विक रेस्पॉन्स फोर्स की होगी तैनाती

मित्र राष्ट्रों ने अपने साल 2023 विनियस शिखर सम्मेलन में अपनी क्षेत्रीय योजनाओं का निपटारा करने के लिए हस्ताक्षर किए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी देशों ने अफगानिस्तान और इराक में कई छोटे युद्ध लड़े और महसूस किया कि सोवियत के बाद रूस अब आगे नहीं रहेगा. स्टीडफास्ट डिफेंडर अभ्यास के कहा गया है कि नाटो के पूर्वी हिस्से पर पोलैंड में क्विक रेस्पॉन्स फोर्स की तैनाती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

ये हैं नाटो के 31 सदस्य देश

अल्बानिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, चेकिया, डेनमार्क, एस्तोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, यूनान, हंगरी, आइसलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्समबर्ग, मोंटेनेग्रो, नीदरलैंड, उत्तर मैसेडोनिया, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य और तुर्किये.