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मुअम्मर अल गद्दाफी: सिर्फ 27 साल की उम्र में किया तख्तापलट, फिर ऐसे बना लीबिया का सबसे ताकतवर शासक

1 सितंबर 1969 को लीबिया में 27 वर्षीय सेना कप्तान मुअम्मर अल-गद्दाफी ने तख्तापलट कर राजा इदरीस-1 की सत्ता खत्म कर दी थी. इसके बाद गद्दाफी ने करीब चार दशक तक लीबिया पर शासन किया.

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Edited By: Reepu Kumari
मुअम्मर अल गद्दाफी: सिर्फ 27 साल की उम्र में किया तख्तापलट, फिर ऐसे बना लीबिया का सबसे ताकतवर शासक
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: लीबिया के इतिहास में 1 सितंबर 1969 एक ऐसा दिन था, जिसने देश की राजनीति की दिशा बदल दी. इसी दिन सेना के युवा कप्तान मुअम्मर अल-गद्दाफी ने अपने साथियों के साथ मिलकर राजा इदरीस-1 के खिलाफ तख्तापलट किया. उस समय गद्दाफी की उम्र महज 27 साल थी. राजा इदरीस देश से बाहर थे और गद्दाफी ने इसी मौके का इंतजार किया. तख्तापलट के बाद राजशाही समाप्त कर दी गई और सत्ता की कमान नए शासन तंत्र के हाथों में चली गई.

किसना परिवार में जन्म

गद्दाफी को लीबिया की नई शासी संस्था रिवोल्यूशनरी कमांड काउंसिल का अध्यक्ष बनाया गया. उनका जन्म 1942 में लीबिया के रेगिस्तान में एक तंबू में हुआ था. वह एक खानाबदोश किसान के बेटे थे और पढ़ाई में प्रतिभाशाली माने जाते थे. उन्होंने 1963 में लीबिया विश्वविद्यालय और 1965 में बेनगाजी स्थित लीबियाई सैन्य अकादमी से पढ़ाई पूरी की. अरब राष्ट्रवाद से प्रभावित गद्दाफी ने कुछ साथी अधिकारियों के साथ सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई थी.

राजा के देश से बाहर जाते ही बदली तस्वीर

गद्दाफी ने राजा इदरीस के देश से बाहर जाने का इंतजार किया. इदरीस तुर्की के एक स्पा में पैर की बीमारी का इलाज करा रहे थे. इसी दौरान गद्दाफी और उनके साथियों ने बिना रक्तपात के सत्ता पर कब्जा कर लिया. इदरीस बाद में तुर्की से ग्रीस और फिर मिस्र चले गए. 1983 में काहिरा में उनका निधन हुआ.

पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ उठाए बड़े कदम

सत्ता संभालने के बाद गद्दाफी ने इस्लामी रूढ़िवादिता, क्रांतिकारी समाजवाद और अरब राष्ट्रवाद के मिश्रण पर आधारित शासन स्थापित किया. 1970 में उन्होंने अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य अड्डे हटाए. इतालवी और यहूदी लीबियाई लोगों को भी देश से निष्कासित किया गया. 1973 में विदेशी स्वामित्व वाले तेल क्षेत्रों पर नियंत्रण हासिल किया गया.

सामाजिक बदलावों के साथ सख्त शासन

गद्दाफी सरकार ने शराब और जुए पर प्रतिबंध जैसे पारंपरिक इस्लामी कानून फिर लागू किए. दूसरी ओर महिलाओं को अधिक स्वतंत्रता देने और सामाजिक कार्यक्रम चलाने की दिशा में भी कदम उठाए गए. इन कार्यक्रमों से लीबिया में जीवन स्तर में सुधार होने की बात सामने आई. हालांकि, उनका शासन लगातार पश्चिमी देशों के साथ तनाव और विवादों से घिरा रहा.

आतंकवाद के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें

गद्दाफी की सरकार पर दुनियाभर के कई आतंकवादी संगठनों को आर्थिक मदद देने के आरोप लगे. इनमें फिलिस्तीनी गुरिल्ला, फिलीपीन मुस्लिम विद्रोही और आयरिश रिपब्लिकन आर्मी शामिल थे. 1980 के दशक में पश्चिमी देशों ने यूरोप में हुए कई हमलों के लिए गद्दाफी को जिम्मेदार ठहराया. अप्रैल 1986 में अमेरिका ने पश्चिमी जर्मनी के एक डांस हॉल में हुए बम हमले के जवाब में त्रिपोली पर बमबारी की.

2011 में खत्म हुआ चार दशक का शासन

फरवरी 2011 में अरब जगत में फैली अशांति के बीच लीबिया में गद्दाफी के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन शुरू हुए. हालात धीरे-धीरे गृहयुद्ध में बदल गए और विद्रोहियों तथा गद्दाफी समर्थकों के बीच संघर्ष बढ़ गया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने गद्दाफी के गढ़ों पर हवाई हमले शुरू किए. 20 अक्टूबर 2011 को विद्रोहियों ने गद्दाफी को पकड़ लिया और उनकी हत्या कर दी.