नई दिल्ली: अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में शनिवार को एक फेडरल इमिग्रेशन ऑपरेशन के दौरान 37 वर्षीय व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई, जिससे शहर में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बहस तेज हो गई है. मृतक की पहचान एलेक्स जेफ्री प्रेट्टी के रूप में हुई है, जो दक्षिण मिनियापोलिस का निवासी और अमेरिकी नागरिक था.
यह घटना उस समय हुई जब फेडरल एजेंट इलाके में प्रवर्तन कार्रवाई कर रहे थे. घटना का वीडियो वहां मौजूद लोगों ने रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. परिवार और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार एलेक्स प्रेट्टी पेशे से आईसीयू नर्स था और उसका कोई गंभीर आपराधिक इतिहास नहीं था. उसके खिलाफ केवल कुछ ट्रैफिक चालान दर्ज थे.
Drop Site obtained harrowing footage of the latest killing which appears to be from the perspective of the woman in pink filming from the sidewalk pic.twitter.com/VheZfVSmoE
— Ryan Grim (@ryangrim) January 24, 2026
स्थानीय पुलिस ने भी पुष्टि की कि वह कानूनी रूप से हथियार रखने की अनुमति वाला नागरिक था. घटना स्थल पर प्रेट्टी के पास एक हैंडगन और दो मैगजीन होने की बात कही गई है.
होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के अनुसार फेडरल एजेंट एक लक्षित इमिग्रेशन ऑपरेशन चला रहे थे, तभी प्रेट्टी ने यूएस बॉर्डर पेट्रोल अधिकारियों के पास जाकर हथियार दिखाया. एजेंसी का दावा है कि एजेंटों ने उसे निहत्था करने की कोशिश की, लेकिन उसने विरोध किया और स्थिति हिंसक हो गई. इसके बाद एक अधिकारी ने आत्मरक्षा में गोली चलाई.
यह गोलीबारी शनिवार तड़के दक्षिण मिनियापोलिस के वेस्ट 26थ स्ट्रीट और निकोलेट एवेन्यू के पास हुई. यह घटना पिछले तीन हफ्तों में फेडरल एजेंटों से जुड़ी दूसरी घातक गोलीबारी बताई जा रही है. इससे पहले रेनी गुड नामक महिला की भी इसी तरह की घटना में मौत हुई थी.
घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और अन्य नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया गया. इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज रहीं.
मिनेसोटा के गवर्नर और शहर के मेयर ने फेडरल एजेंसियों के बयान पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की. वहीं डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस जैसे नेताओं ने राज्य प्रशासन पर कानून लागू न करने के आरोप लगाए. मामले की जांच मिनियापोलिस पुलिस और फेडरल एजेंसियां मिलकर कर रही हैं. फिलहाल किसी पर भी आरोप तय नहीं किए गए हैं.