नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच छिड़ी जंग अब नए आयाम ले रही है. हाल के दिनों में दोनों पक्षों से मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर जारी है, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है. सऊदी अरब के महत्वपूर्ण प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरानी मिसाइल हमले ने अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है. इस जंग के करीब दो सप्ताह बाद अमेरिका अपनी ताकत बढ़ा रहा है, जबकि तेहरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच इजरायली हमलों की आशंका बढ़ गई है. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ईरान कमजोर पड़ रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि हाल ही में ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर खड़े पांच अमेरिकी KC-135 स्ट्रैटोटैंकर रिफ्यूलिंग विमानों को निशाना बनाया. ये विमान जमीनी स्तर पर क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन पूरी तरह तबाह नहीं हुए. मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है. हमले में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, जो राहत की बात है, लेकिन इससे अमेरिकी हवाई अभियानों पर असर पड़ सकता है.
जंग शुरू हुए दो सप्ताह बाद अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत की है. रिपोर्टों के मुताबिक, यूएसएस त्रिपोली एम्फीबियस असॉल्ट शिप और 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के करीब 2,500 मरीन सैनिक मध्य पूर्व की ओर रवाना हो चुके हैं. ये तैनाती जापान से हो रही है और इसमें कुछ हफ्ते लग सकते हैं. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने और अभियानों को समर्थन देने के लिए उठाया गया है.
ईरानी राजधानी तेहरान में फिलिस्तीन समर्थन और इजरायल विरोधी कुद्स दिवस रैली के दौरान फिरदौसी चौक पर जोरदार विस्फोट हुए. हजारों लोग 'इजरायल मुर्दाबाद' और 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे थे, तभी धमाके से इलाका थर्रा उठा. इजरायल ने पहले मध्य तेहरान को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी. ईरानी मीडिया ने इसे इजरायली हमला बताया, जबकि स्थिति पर तनाव और बढ़ गया है.
इसी बीच इजरायल के तेल अवीव में भी कई विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं. इजरायली सेना ने ईरान से मिसाइल दागे जाने की चेतावनी जारी की थी. दोनों ओर से जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला जारी है, जिससे आम लोगों में डर का माहौल है. क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी-7 नेताओं से वर्चुअल बैठक में कहा कि ईरान जल्द सरेंडर कर देगा. उन्होंने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की सफलता का दावा करते हुए कहा, 'मैंने एक ऐसे कैंसर से छुटकारा दिलाया है जो हम सभी के लिए खतरा था.' जी-7 नेताओं ने युद्ध जल्द खत्म करने और रूस को फायदा न उठाने देने की अपील की. ट्रंप के इस बयान से जंग के अंत की उम्मीद जगी है, लेकिन फिलहाल स्थिति गंभीर बनी हुई है.