ईरान के दक्षिणी प्रांत होर्मोजगान के मिनाब शहर में हुए भीषण हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. एक स्कूल पर हुए हमले में 165 मासूम छात्राओं की जान चली गई. चार दिन से जारी सैन्य तनाव के बीच यह घटना सबसे दर्दनाक साबित हुई. मंगलवार को इन बच्चियों का सामूहिक जनाजा निकाला गया, जहां हर आंख नम थी. शहर का माहौल सन्नाटे और गहरे दुख से भरा रहा.
28 फरवरी को मिनाब के एक स्कूल परिसर पर अचानक हमला हुआ. धमाके के बाद इमारत का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल गया. बचाव दल ने घंटों तक राहत अभियान चलाया और घायल बच्चों को अस्पताल पहुंचाया. जब मलबा पूरी तरह हटाया गया तो 165 मौतों की पुष्टि हुई. मरने वालों में अधिकतर प्राथमिक कक्षाओं की छात्राएं थीं. इस त्रासदी ने स्थानीय परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया.
मंगलवार को शहर के मुख्य मैदान में सभी बच्चियों के ताबूत एक कतार में रखे गए. यह दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद लोग खुद को संभाल नहीं पा रहे थे. हजारों नागरिक नमाज-ए-जनाजा में शामिल हुए. आसपास के कस्बों से भी लोग अंतिम विदाई देने पहुंचे. दुआओं और आंसुओं के बीच बच्चियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया.
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ईरान में इज़राइली-अमेरिकी हमलों के दौरान मारी गईं स्कूली बच्चियों और टीचरों के अंतिम संस्कार के बेहद ग़मगीन और दुखद मौक़े का एक और वीडियो https://t.co/euJC42YL1K pic.twitter.com/eFuyoVJuMq
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) March 3, 2026
जनाजे के दिन मिनाब के बाजार बंद रहे. लोगों ने काली पट्टियां बांधकर शांति मार्च निकाला और हमले की निंदा की. मस्जिदों में विशेष दुआएं की गईं. हर गली में मातम पसरा रहा। स्थानीय नागरिकों ने मासूमों की मौत पर न्याय की मांग उठाई. इस घटना ने पूरे क्षेत्र को गहरे दुख और गुस्से से भर दिया है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, स्कूल परिसर को फिलहाल बंद कर दिया गया है. अन्य शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. जांच एजेंसियां हमले की परिस्थितियों की पड़ताल कर रही हैं. रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी. इस त्रासदी ने न केवल मिनाब बल्कि पूरे ईरान को झकझोर दिया है और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.