नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर उत्साह किसी से छिपा नहीं है. वेनेजुएला से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद अब नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरेना मचाडो ने ट्रंप को अपना पुरस्कार देने की इच्छा जताई है. इस बयान के सामने आते ही नोबेल पुरस्कार समिति की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया भी आ गई है.
नोबेल समिति नॉर्वे ने साफ शब्दों में कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार न तो किसी के साथ साझा किया जा सकता है, न ही उसे रद्द किया जा सकता है और न ही किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा जा सकता है. समिति का यह बयान तब सामने आया, जब ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अगर मचाडो उन्हें यह पुरस्कार देना चाहती हैं, तो वह इसे लेने या साझा करने के लिए तैयार हैं. ट्रंप का यह भी कहना था कि उनके अनुसार, उनसे ज्यादा इस सम्मान का हकदार कोई और नहीं है.
ट्रंप के इस बयान के बाद मारिया मचाडो ने भी अपनी बात रखी थी. उन्होंने कहा था कि वह अपना नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति को देना चाहती हैं. इसके बाद नोबेल समिति ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि एक बार जब नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो जाती है, तो उसका फैसला अंतिम होता है और उसमें किसी भी तरह का बदलाव संभव नहीं होता.
समिति के बयान में कहा गया कि नोबेल पुरस्कार को किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करने का कोई नियम नहीं है. यह पुरस्कार हमेशा उसी व्यक्ति के नाम रहता है, जिसे समिति ने चुना हो. ऐसे में ट्रंप को पुरस्कार देने या साझा करने की बात पूरी तरह असंभव है.
गौरतलब है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद मारिया मचाडो जल्द ही वाशिंगटन का दौरा करने वाली हैं. माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान वह वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद के लिए अमेरिका से समर्थन की उम्मीद कर सकती हैं. हालांकि, इस दौरे से पहले ही ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार को लेकर अपनी राय खुलकर रख दी है.
जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाया गया था, तब यह कयास लगाए जा रहे थे कि अमेरिका मचाडो को वहां का राष्ट्रपति बनाने की कोशिश करेगा. लेकिन ट्रंप ने इस तरह की किसी भी योजना से इनकार कर दिया. इसके बाद वेनेजुएला में उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने मादुरो की जगह सत्ता संभाल ली.