नई दिल्ली: ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ उठी आवाजें अब देश के कोने-कोने तक पहुंच चुकी हैं. कड़ी सुरक्षा, गिरफ्तारियों और लगभग पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद लोग सड़कों पर डटे हुए हैं. इस बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने आंदोलन को केवल प्रदर्शन तक सीमित न रखने, बल्कि सत्ता पर सीधा दबाव बनाने का आह्वान किया है.
ईरान में प्रदर्शन लगातार 13वें दिन भी जारी हैं. तेहरान से लेकर छोटे शहरों तक लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. सुरक्षा बलों की सख्ती के बावजूद आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है. इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं, फिर भी वीडियो और सूचनाएं किसी न किसी तरह बाहर आ रही हैं. हालात यह संकेत दे रहे हैं कि असंतोष अब केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा.
निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने शनिवार को जारी बयान में आंदोलन की दिशा बदलने की बात कही. उन्होंने कहा कि अब केवल सड़कों पर उतरना पर्याप्त नहीं है. उनका मानना है कि प्रदर्शनकारियों को शहरों के प्रमुख केंद्रों पर नियंत्रण स्थापित कर संगठित नागरिक प्रतिरोध को मजबूत करना चाहिए, ताकि मौजूदा सत्ता पर वास्तविक दबाव बनाया जा सके.
रेजा पहलवी ने खास तौर पर परिवहन, तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़े कर्मचारियों से देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया. उन्होंने इन क्षेत्रों को ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया. पहलवी के अनुसार यदि इन सेक्टरों में कामकाज ठप होता है, तो शासन पर सीधा और गहरा असर पड़ेगा, जिससे आंदोलन को निर्णायक बढ़त मिल सकती है.
रिपोर्ट्स के अनुसार हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. 10 जनवरी तक तेहरान के छह अस्पतालों में कम से कम 217 मौतें दर्ज की गई हैं. राष्ट्रीय स्तर पर अन्य रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 65 बताई जा रही है, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. इसके अलावा 180 शहरों में 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है.
कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा शासन के खिलाफ नारेबाजी की. ये नारे 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले के दौर की ओर इशारा करते हैं. मशहद में एक सार्वजनिक स्थान से ईरानी झंडा हटाए जाने की घटना भी सामने आई है, जिसे सत्ता के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखा जा रहा है.