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नक्शे से मिट गए गांव! इजरायल ने लेबनान में रिमोट धमाकों से मचाई तबाही, घरों को मलबे में बदला

इजराइल द्वारा दक्षिण लेबनान में गांवों को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट करने से मानवीय संकट गहरा गया है. 'गाजा मॉडल' पर आधारित इन विस्फोटों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और विस्थापन को लेकर वैश्विक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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नक्शे से मिट गए गांव! इजरायल ने लेबनान में रिमोट धमाकों से मचाई तबाही, घरों को मलबे में बदला
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: नक्शे पर आज भी उन गांवों के नाम दर्ज हैं, लेकिन जमीन पर अब वहां सिर्फ धूल और मलबे के ढेर बचे हैं. दक्षिण लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने एक ऐसा भयावह रूप ले लिया है, जहां घर, बाजार और पीढ़ियों की यादें पल भर में मिटाई जा रही हैं. जब दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद में होने वाली कूटनीतिक चर्चाओं पर टिकी थीं, तब लेबनान की जमीनी हकीकत एक अलग ही बर्बादी की कहानी लिख रही थी. इजरायली सेना ने नागरिक बस्तियों को निशाना बनाकर एक सोची-समझी योजना के तहत तबाही मचाई है.

'द गार्जियन' की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली सेना सीमावर्ती गांवों में घरों के भीतर विस्फोटक लगाकर रिमोट से धमाके कर रही है. इन विस्फोटों की तीव्रता इतनी अधिक है कि पूरे के पूरे मोहल्ले एक साथ जमींदोज हो रहे हैं. तैयबेह, नकौरा और देर सेरियन जैसे गांवों से आए वीडियो फुटेज इन ऑपरेशनों की पुष्टि करते हैं. लेबनानी मीडिया ने भी आसपास के कई गांवों में इसी तरह की बर्बादी की सूचना दी है, जो दर्शाता है कि यह केवल एक हमला नहीं बल्कि गांवों को नक्शे से मिटाने का पैटर्न है.

गाजा मॉडल का लेबनान में विस्तार 

इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने सार्वजनिक रूप से सीमावर्ती गांवों के सभी घरों को नष्ट करने का आह्वान किया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से गाजा के रफा और बेत हनौन में अपनाए गए मॉडल का हवाला देते हुए कहा कि उत्तरी निवासियों के खतरों को खत्म करने के लिए इन गांवों को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा. रफा में पहले ही इस नीति की कड़ी आलोचना हुई थी, जहां लगभग 90 प्रतिशत घर मलबे में बदल दिए गए थे. अब वही रणनीति लेबनान में दोहराई जा रही है.

अंतरराष्ट्रीय कानून और इजराइल का तर्क 

इजराइल का दावा है कि वह हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है, क्योंकि यह समूह नागरिक इलाकों से अपनी गतिविधियां संचालित करता है. हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा है कि गांवों का इस बड़े पैमाने पर विनाश कानूनी सीमाओं का उल्लंघन है. अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार, नागरिक घरों को तब तक नष्ट नहीं किया जा सकता जब तक कि कोई प्रत्यक्ष सैन्य आवश्यकता न हो. पूरे गांवों को साफ कर देना इस कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता.

लितानी नदी तक 'सुरक्षा क्षेत्र' की योजना 

इजराइल ने संकेत दिया है कि वह दक्षिण लेबनान के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है. लितानी नदी तक एक 'सुरक्षा क्षेत्र' बनाने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसके तहत विस्थापित निवासियों को तब तक लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि इजरायली अधिकारी सीमा को सुरक्षित घोषित न कर दें. यह योजना विस्थापित परिवारों के लिए एक लंबी और अनिश्चित प्रतीक्षा बन सकती है. सुरक्षा के नाम पर बनाए जा रहे इस बफर जोन ने स्थानीय आबादी के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है.

विस्थापन और अनिश्चितता का नया दौर 

दक्षिण लेबनान दशकों से संघर्ष और विस्थापन का गवाह रहा है, जिसके कारण कई परिवार पहले ही दुनिया के अलग-अलग कोनों में बिखर चुके हैं. अब गांवों के पूर्ण विनाश से स्थायी विस्थापन का डर और गहरा गया है. पीढ़ियों की विरासत को धूल में मिलते देख स्थानीय निवासियों में भारी रोष और दुख है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी के बीच लेबनान की यह सांस्कृतिक और भौतिक क्षति आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है.