इस देश में हुआ अब तक सबसे भीषण आतंकी हमला, रक्षा मंत्री की हुई दर्दनाक मौत; बम धमाकों से मची अफरा-तफरी
पश्चिमी अफ्रीकी देश माली में अल-कायदा से जुड़े आतंकियों और तुआरेग विद्रोहियों ने एक साथ भीषण हमला किया है. इस हमले में रक्षा मंत्री सादियो कैमारा की मौत हो गई और विद्रोहियों ने किडाल शहर पर कब्जे का दावा किया है.
नई दिल्ली: पश्चिमी अफ्रीका के अशांत देश माली में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. आतंकवादियों और विद्रोही गुटों ने मिलकर अब तक का सबसे बड़ा और घातक हमला किया है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस सुनियोजित हमले में न केवल देश के कई हिस्सों को निशाना बनाया गया, बल्कि राजधानी के पास स्थित सैन्य ठिकाने पर हमला कर रक्षा मंत्री की जान ले ली गई. यह घटना माली की वर्तमान सैन्य सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी और कठिन सुरक्षा चुनौती बनकर उभरी है.
फ्रांस के रेडियो चैनल RFI की रिपोर्ट के अनुसार, अल-कायदा से जुड़े JNIM संगठन के आतंकियों ने राजधानी बामाको के करीब काटी मिलिट्री बेस को अपना मुख्य निशाना बनाया. यह वह रणनीतिक स्थान है जहां माली के रक्षा मंत्री सादियो कैमारा का आवास स्थित था. हमला इतना भीषण और सटीक था कि मंत्री के घर को सीधा निशाना बनाया गया, जिसमें उनकी दुखद मौत हो गई. यह पहली बार है जब विद्रोहियों ने इतने सुरक्षित सैन्य क्षेत्र में घुसकर इतने बड़े पद के नेता की हत्या की है.
कई हिस्सों में एक साथ भीषण हमले
यह हमला पिछले कई वर्षों में सबसे अधिक संगठित और सोची-समझी योजना का हिस्सा प्रतीत होता है. आतंकियों और तुआरेग विद्रोहियों ने केवल राजधानी ही नहीं, बल्कि सोने की खदानों वाले संपन्न इलाकों और देश के अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों पर एक साथ प्रहार किया. इस घातक तालमेल ने सरकारी फौज को संभलने का कोई मौका नहीं दिया. पहले आतंकी केवल दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक सीमित रहते थे, लेकिन इस बार उनका निशाना सीधे देश की सत्ता और अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र रहे जो सुरक्षा में बड़ी चूक है.
किडाल शहर पर कब्जे का बड़ा दावा
उत्तरी माली का किडाल शहर रणनीतिक रूप से दोनों पक्षों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. लंबे समय से यह शहर सरकार और विद्रोहियों के बीच जारी खूनी संघर्ष का अखाड़ा बना हुआ है. ताजा घटनाक्रम में तुआरेग विद्रोहियों ने यह बड़ा दावा किया है कि उन्होंने सरकारी सेना को खदेड़कर किडाल पर फिर से अपना पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है. हालांकि, इस दावे की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन अगर यह सच साबित होता है, तो यह माली की सेना के लिए बड़ी हार होगी.
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के पीछे की नई रणनीति अत्यंत खतरनाक है. अल-कायदा से जुड़े JNIM और तुआरेग विद्रोहियों का एक साथ आना सरकार के लिए दोहरी मुसीबत बन गया है. अब हमलावर ग्रामीण इलाकों को छोड़कर तेजी से शहरों और राजधानी की ओर बढ़ रहे हैं. रक्षा मंत्री जैसे वीवीआईपी को उनके घर में निशाना बनाना यह दर्शाता है कि विद्रोहियों के खुफिया तंत्र और सैन्य क्षमता में काफी इजाफा हुआ है. इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता और आम नागरिकों की सुरक्षा अब खतरे में है.
माली का संघर्ष और फौजी शासन
माली में पिछले कई सालों से अस्थिरता का माहौल बना हुआ है. वर्तमान में वहां सेना का शासन है, जिसने आतंकवाद और विद्रोही गुटों को जड़ से खत्म करने का वादा किया था. लेकिन जेएनआईएम और तुआरेग विद्रोही लगातार संगठित होकर सरकार को चुनौती दे रहे हैं. जेएनआईएम जहां देश में कट्टरपंथी इस्लामी सत्ता चाहता है, वहीं तुआरेग समूह उत्तरी माली में अपनी अलग पहचान और शासन की मांग कर रहे हैं. इस खूनी संघर्ष में अब तक कितने लोग हताहत हुए हैं, इसकी सटीक जानकारी आना बाकी है.