पाकिस्तान के मुरीदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा के भारी सुरक्षा वाले मुख्यालय से एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है. संगठन के वरिष्ठ और रसूखदार कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की ईद की नमाज के ठीक बाद परिसर के अंदर ही गोली मारकर और चाकू घोंपकर निर्मम हत्या कर दी गई है. इस हाई-प्रोफाइल मर्डर ने न केवल पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों के सुरक्षित ठिकानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि लश्कर के भीतर गहरे गृहयुद्ध और सत्ता संघर्ष को भी बेनकाब कर दिया है. इस धुरंधर स्टाइल में हुई हत्या ने सबको चौंका कर रख दिया है.
सूत्रों के अनुसार, यह सनसनीखेज वारदात रविवार को लाहौर के पास स्थित लश्कर के मुख्य केंद्र मरकज तैयबा परिसर में हुई. हेडक्वार्टर में आयोजित ईद की नमाज में मौलाना अबू जर और मौलाना अब्दुल रहमान आबिद जैसे लश्कर के कई शीर्ष आतंकी और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे. चश्मदीदों के मुताबिक, नमाज खत्म होने के कुछ ही देर बाद जब सलाफी इबादतगाह से बाहर निकल रहे थे, उसी समय दो हमलावरों ने उन पर घात लगाकर हमला किया.
खबरों के मुताबिक, एक व्यक्ति ने बेहद करीब से उन पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जबकि एक महिला ने खंजर से उन पर ताबड़तोड़ वार किए. इस दोहरे हमले में सलाफी को जानलेवा चोटें आईं. लश्कर के अन्य आतंकी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन गंभीर रूप से घायल सलाफी ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.
फुटेज में सलाफी को मुख्यालय परिसर के अंदर खून से लथपथ ज़मीन पर पड़ा देखा जा सकता है. वीडियो में हेडक्वार्टर के अंदर भारी अफरातफरी और नियंत्रण की कमी साफ झलक रही है. एक चौंकाने वाले दृश्य में मुरीदके में लश्कर के आतंकी ट्रेनिंग प्रमुख मौलाना अबू ज़र को एक अन्य व्यक्ति द्वारा शारीरिक रूप से रोके जाते हुए देखा गया है, जो संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच भीषण फूट और अराजकता के स्पष्ट संकेत दे रहा है.
बिलाल आरिफ सलाफी 2005 से लश्कर-ए-तैयबा से सक्रिय रूप से जुड़ा था और संगठन के भीतर एक महत्वपूर्ण वित्तीय स्तंभ था उसने लश्कर के लिए चंदा जुटाने के अभियानों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था. माना जाता है कि इस चंदे का इस्तेमाल कथित तौर पर हथियार खरीदने और आतंकी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए किया जाता था. वह मुरीदके स्थित तैयबा कॉलोनी में अन्य वरिष्ठ कमांडरों के साथ रहता था, जो उसकी सांगठनिक अहमियत को दर्शाता है.