नई दिल्ली: उत्तर कोरिया में किम जोंग उन की तानाशाही का दौर जारी रहेगा. रविवार को पार्टी के नौवें अधिवेशन के चौथे दिन उन्हें एक बार फिर जनरल सेक्रेटरी पद पर चुना गया. सरकारी मीडिया केसीएनए ने सोमवार को यह खबर दी. हजारों प्रतिनिधियों की 'अटूट इच्छा और सर्वसम्मति' से यह निर्णय लिया गया.
किम की अगुवाई में देश की परमाणु शक्ति आधारित युद्ध रोकने की क्षमता काफी बढ़ी है. अधिवेशन में पार्टी नियमों में बदलाव भी मंजूर हुए, ताकि पार्टी की एकता और अनुशासन मजबूत हो. यह घटना किम परिवार के लंबे शासन को और मजबूत करती है.
यह पार्टी अधिवेशन पांच साल में एक बार होता है और उत्तर कोरिया के बंद सिस्टम की झलक दिखाता है. गुरुवार से शुरू हुए इस नौवें अधिवेशन में करीब 5000 सदस्य शामिल हुए. किम ने शुरुआती भाषण में लोगों का जीवन स्तर बेहतर करने का वादा किया. प्रतिबंधों से प्रभावित अर्थव्यवस्था पर दबाव है, इसलिए विकास और सुधार पर फोकस है. यह बैठक घरेलू नीतियों से लेकर रक्षा रणनीति तक तय करती है.
किम जोंग उन ने 2011 में सत्ता संभाली. कई दशकों से परमाणु हथियारों को प्राथमिकता दी गई, जिससे अकाल जैसी स्थिति बनी. लेकिन किम ने अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया. 2021 के अधिवेशन में उन्होंने आर्थिक क्षेत्रों में गलतियां स्वीकारी थीं, जो दुर्लभ था. इस बार भी उन्होंने कहा कि पार्टी के सामने अर्थव्यवस्था मजबूत करना, जीवन स्तर सुधारना और समाज में बदलाव लाना बड़े काम हैं. परमाणु कार्यक्रम अगले चरण में जाएगा.
अधिवेशन में पार्टी नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई. इसका मकसद पार्टी की एकता को गुणात्मक रूप से मजबूत करना और अनुशासन में निष्पक्षता लाना है. किम परिवार के शासन में यह वर्कर्स पार्टी का नौवां अधिवेशन है. किम के पिता के समय यह बंद रहा, 2016 में फिर शुरू हुआ. किम ने व्यक्तित्व पूजा बढ़ाई और इस अधिवेशन से अपनी पूर्ण सत्ता का प्रदर्शन किया.
यह अधिवेशन किम की 15 साल की सत्ता को मजबूत करता है. प्रतिनिधियों ने उनकी परमाणु नीति की तारीफ की, जो क्षेत्रीय स्थिति मजबूत करने में मददगार रही. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद आर्थिक सुधार पर जोर है. दुनिया से कटा यह देश अपनी नीतियां गोपनीय रखता है. किम की अगुवाई में परमाणु ताकत और आर्थिक विकास दोनों पर फोकस रहेगा. स्थिति पर नजर बनी हुई है.