नई दिल्ली: कश्मीर मुद्दे पर एक चौंकाने वाला और गंभीर दावा सामने आया है, जिसने पूरे विवाद को नए सिरे से चर्चा में ला दिया है. पाकिस्तान के देवबंदी मौलवी मुफ्ती सईद खान ने अपने एक सार्वजनिक भाषण में उग्रवादियों के व्यवहार को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कश्मीर में सक्रिय कुछ समूह, जिन्हें अक्सर 'मुझाहिदीन' के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, वास्तव में कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं का शोषण कर रहे हैं. यह बयान मानवीय पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
मुफ्ती सईद खान ने ‘कश्मीर और हमारी पाखंडता’ शीर्षक से दिए गए अपने व्याख्यान में इन आरोपों का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक आइसोलेटेड घटना नहीं है, बल्कि एक व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा है. उनके अनुसार, यह सच्चाई लंबे समय से छुपाई जाती रही है और अब सामने आ रही है.
खान ने विशेष रूप से उन महिलाओं और लड़कियों का जिक्र किया जो शरणार्थी शिविरों में रह रही हैं. उन्होंने कहा कि ये महिलाएं बेहद खराब हालात में जी रही हैं, जहां भोजन जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पातीं. ऐसे में कुछ उग्रवादी उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें 'एक रोटी' के बदले यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करते हैं.
यहां देखें वीडियो
Mufti Saeed Khan (Pakistani Islamic Scholar) narrates that at the height of Kashmir conflict, the so called “Mujahideen” would get “khoobsurat (beautiful)” young (muslim) women from refugee camps in exchange for a roti (bread). Link to this video in the comments. https://t.co/Mua8CayhC8 pic.twitter.com/gDKwAniQtp
— Omar Abbas Hyat | ഒമർ അബ്ബാസ് (@OmarAbbasHyat) March 29, 2026
अपने बयान में खान ने यह भी कहा कि जिन लोगों को धार्मिक योद्धा या 'मुझाहिदीन' कहकर सम्मानित किया जाता है, उनके इस तरह के कृत्य उस छवि को गंभीर रूप से धूमिल करते हैं. उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि जमीन पर वास्तविकता कुछ और ही है, जो प्रचारित छवि से बिल्कुल अलग है.
सूत्रों के अनुसार बताया गया कि खान के ये उन दस्तावेजों और रिपोर्ट्स से मेल खाते हैं, जिनमें पहले भी ऐसे आरोप लगाए गए थे. कहा गया कि कुछ संगठित और बाहरी समर्थन प्राप्त समूह स्थानीय आबादी पर ही अत्याचार करते रहे हैं और उनकी स्थिति का फायदा उठाते हैं. इस खुलासे ने मानवाधिकार संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दों को नई मजबूती दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह न केवल महिलाओं के साथ गंभीर अन्याय है, बल्कि पूरे क्षेत्र की छवि और सामाजिक ढांचे पर भी गहरा असर डालता है.