खामेनेई के बाद अब बेटे को इजरायल का 'डेथ वारंट', पद संभालने से पहले ही मौत की धमकी; ईरान में मचा हड़कंप!
इजरायल ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई को हत्या की खुली धमकी दी है. रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि इजरायल और उसके सहयोगियों को धमकाने वाला कोई भी नेता बख्शा नहीं जाएगा.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में संघर्ष एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोज्तबा के उत्तराधिकारी बनने की खबरों ने इजरायल को आक्रामक कर दिया है. इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे ईरान के नए नेतृत्व को निशाना बनाने के लिए तैयार हैं. यह टकराव अब पूरे क्षेत्र की शांति को खतरे में डाल रहा है.
इजराइल काट्ज ने सोशल मीडिया पर कड़े संदेश में मोज्तबा को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि ईरान सरकार जिस भी नेता को इजरायल और अमेरिका के खिलाफ साजिश रचने के लिए चुनेगी, वह उनके निशाने पर होगा. काट्ज ने हिब्रू में स्पष्ट किया कि दुश्मन का नाम चाहे जो भी हो और वह कहीं भी छिपा हो, इजरायल उसे खोज निकालेगा. यह बयान दर्शाता है कि इजरायल अब ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की योजना बना रहा है.
रक्षा मंत्री ने इजरायली रक्षा बल (IDF) को 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हर संभव तरीके से तैयार रहने का आदेश दिया है. उन्होंने बताया कि वे अमेरिकी साथियों के साथ मिलकर इस शासन की ताकत को तोड़ने का काम जारी रखेंगे. इजरायल का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना है ताकि वहां एक ऐसी सरकार बन सके जो क्षेत्र में आतंक फैलाने के बजाय शांति का मार्ग अपनाए.
खामेनेई परिवार पर प्रहार
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. यह हमला उनके निजी परिसर में हुआ था, जिसमें उनकी बेटी, दामाद और पोती भी मारे गए थे. खामेनेई की पत्नी मंसूरेह भी हमले में बुरी तरह घायल हुई थीं और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया. इस प्रहार ने ईरान के सबसे प्रभावशाली परिवार को गहरा जख्म दिया है और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है.
उत्तराधिकार और विवाद
खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोज्तबा खामेनेई को उत्तराधिकारी चुने जाने की खबर है. ईरानी मीडिया के अनुसार, 88 सदस्यों वाली असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उन्हें इस पद के लिए चुना है. हालांकि, ईरान के संविधान के अनुसार सर्वोच्च नेता के पास उच्च धार्मिक दर्जा होना चाहिए. मोज्तबा की धार्मिक रैंक लंबे समय से धर्मगुरुओं के बीच विवाद का विषय रही है, जिससे उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता पर सवाल उठ रहे हैं.
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