इजरायल ने पहली बार कैस्पियन सागर में दागीं मिसाइलें, रूस-ईरान की हथियार सप्लाई लाइन को बनाया टारगेट
इजरायल ने पहली बार कैस्पियन सागर में हमला कर रूस-ईरान की हथियार सप्लाई लाइन को निशाना बनाया है. बंदर अंजली बंदरगाह पर किए गए हमले में कई नौसैनिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है.
नई दिल्ली: मध्य पूर्व की जंग अब नई सीमाओं को पार कर रही है. इजरायल ने पहली बार कैस्पियन सागर में सैन्य हमला किया है. इस हमले का मुख्य लक्ष्य रूस और ईरान के बीच चल रही हथियार सप्लाई लाइन को तोड़ना था. इजरायल ने ईरान के बंदर अंजली बंदरगाह पर हमला कर वॉरशिप, नेवल कमांड सेंटर और शिपयार्ड को निशाना बनाया. इस स्ट्राइक से जंग का दायरा और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.
कैस्पियन सागर पर पहला हमला
इजरायल ने कैस्पियन सागर में अपना पहला हमला किया है. यह क्षेत्र रूस और ईरान के लिए बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि यहां से ड्रोन, गोला-बारूद और सैन्य सामान की सप्लाई आसानी से होती थी. इजरायल ने ईरान के प्रमुख बंदरगाह बंदर अंजली को निशाना बनाया. हमले में कई जहाज क्षतिग्रस्त हो गए और नेवल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है.
रूस-ईरान की हथियार सप्लाई लाइन पर असर
यह रूट ईरान के शाहेद ड्रोन और रूस को मिलने वाले हथियारों के लिए बेहद अहम था. रूस इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में कर रहा है. इजरायल का मानना है कि इस हमले से दोनों देशों के बीच हथियारों की सप्लाई रुक सकती है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देश जल्द ही वैकल्पिक रास्ते तलाश लेंगे. रूस ने इस हमले की कड़ी निंदा की है. मॉस्को ने इसे सिविलियन ट्रेड हब पर हमला बताया है. रूस का कहना है कि इजरायल की यह कार्रवाई जंग को और फैलाएगी. इस हमले ने रूस और ईरान के बढ़ते सैन्य सहयोग को भी उजागर कर दिया है.
जंग का बढ़ता दायरा
इजरायल ने इस हमले के जरिए यह संदेश दिया है कि वह दूर-दराज के इलाकों में भी ईरान को निशाना बना सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ एक चेतावनी हो सकती है. आने वाले दिनों में ऐसे और हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस घटना से पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.
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