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India Daily

'हम पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करते', इजरायल ने US-ईरान वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठाए सवाल

इजरायल ने पाकिस्तान को अमेरिका-ईरान वार्ता का मध्यस्थ मानने से इनकार कर दिया है. इजरायली राजदूत रौवन अजार ने कहा कि पाकिस्तान विश्वसनीय नहीं है. उन्होंने लेबनान में हिजबुल्लाह को खत्म करने पर जोर दिया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'हम पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करते', इजरायल ने US-ईरान वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठाए सवाल
Courtesy: grok

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर इजरायल ने सवाल उठाए हैं. इजरायल के भारत में राजदूत रौवन अजार ने कहा कि वे पाकिस्तान को विश्वसनीय मध्यस्थ नहीं मानते. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी वजह से पाकिस्तान की सेवाएं ले रहा है, लेकिन इजरायल का फोकस लेबनान में हिजबुल्लाह की आतंकवादी संरचना को खत्म करने पर है. यह बयान 11 अप्रैल को होने वाली अमेरिका-ईरान सीधी वार्ता से पहले आया है.

पाकिस्तान की भूमिका पर इजरायल का संदेह

इजरायली राजदूत रौवन अजार ने एएनआई से बात करते हुए साफ कहा कि इजरायल पाकिस्तान को विश्वसनीय खिलाड़ी नहीं मानता. उन्होंने कहा, 'हम पाकिस्तान को क्रेडिबल प्लेयर नहीं देखते. अमेरिका अपनी वजहों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल कर रहा है.' अजार ने गाजा में ट्रंप टीम द्वारा कतर और तुर्की जैसे देशों के साथ किए गए समझौतों की तुलना की. उन्होंने जोर दिया कि इजरायल अमेरिका के साथ अंतिम नतीजे पर एकमत रहना चाहता है, लेकिन पाकिस्तान की भूमिका पर उन्हें भरोसा नहीं है.

लेबनान में हिजबुल्लाह पर फोकस

रौवन अजार ने लेबनान और ईरान के मुद्दों को अलग-अलग बताया. उन्होंने कहा कि लेबनान में दक्षिणी इलाके को हिजबुल्लाह की आतंकवादी संरचना से मुक्त करना इजरायल का मुख्य लक्ष्य है. हाल ही में इजरायली वायुसेना ने लेबनान में बड़े ऑपरेशन में 250 से ज्यादा हिजबुल्लाह आतंकियों को मार गिराया. अजार ने कहा कि लिटानी नदी के दक्षिण में हिजबुल्लाह की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं की जा सकती. उन्होंने लेबनान सरकार से अपील की कि वह सिर्फ बातें न करे बल्कि हिजबुल्लाह को निशस्त्र करने में सक्रिय भूमिका निभाए.

ईरान के साथ युद्धविराम पर इजरायल का रुख

इजरायल ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम का समर्थन किया है. राजदूत अजार ने कहा कि वे इस सीजफायर को अच्छा संकेत मानते हैं. उनका मानना है कि बातचीत से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन जैसे दो बड़े खतरे खत्म हो सकते हैं. उन्होंने 15 सूत्रीय योजना का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि वार्ता इन शर्तों पर आगे बढ़ेगी. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि लेबनान का मुद्दा इस सीजफायर से अलग है. 

इजरायल की सुरक्षा चिंता

इजरायली राजदूत ने कहा कि इजरायल को अपने उत्तरी बॉर्डर पर हमलों से बचाव का पूरा अधिकार है. उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह नाजुक सीजफायर को खतरे में डाल रहा है. ट्रंप और नेतन्याहू दोनों ने कहा है कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा नहीं है. अजार ने जोर दिया कि इजरायल की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा है. अगर हिजबुल्लाह की क्षमता बनी रही तो उत्तरी इलाकों में फिर हमले हो सकते हैं. इजरायल चाहता है कि लेबनान सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए और क्षेत्र को आतंकमुक्त बनाए.