नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर चल रही कोशिशें एक बार फिर मुश्किल में पड़ गई हैं. ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को फिर बंद करने के फैसले के बाद व्हाइट हाउस ने तीखा बयान जारी किया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की 10 मांगों वाली लिस्ट को शुरू में ही कूड़ेदान में फेंक दिया था. उन्होंने साफ किया कि ऐसा कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा जो अमेरिका के हितों के खिलाफ हो.
व्हाइट हाउस ने बताया कि ईरान ने शुरुआत में 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा था, जिसे ट्रंप प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया. प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि पूरा प्रस्ताव अस्वीकार्य था और राष्ट्रपति ट्रंप की टीम ने इसे सचमुच कूड़ेदान में फेंक दिया. उन्होंने मीडिया से अपील की कि बिना तथ्यों के खबरें न फैलाई जाएं.
लेबनान पर इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के कुछ घंटों बाद ही फिर बंद कर दिया. ईरान ने अमेरिका को चुनौती देते हुए कहा कि अब ट्रंप को फैसला करना होगा कि वे सीजफायर चाहते हैं या इजरायल के साथ जंग. इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति पर फिर खतरा मंडराने लगा है.
अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने ट्रंप पर तीखा हमला बोला. उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को 'ट्रंप का सरेंडर' बताया और राष्ट्रपति पद के लिए उन्हें मानसिक रूप से अनफिट करार दिया. सीनेटर ने ट्रंप को पद से हटाने के लिए कदम उठाने की अपील भी की है.
कैरोलिन लेविट ने देश को भरोसा दिलाया कि राष्ट्रपति ट्रंप कभी भी ईरान की अनुचित मांगों को स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि कोई भी अंतिम समझौता सिर्फ और सिर्फ अमेरिकी जनता के हित में होगा. व्हाइट हाउस ने साफ किया कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब ईरान यथार्थवादी प्रस्ताव लाएगा.
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने और ट्रंप प्रशासन के सख्त रुख से वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ गई है. अब देखना यह होगा कि दोनों देश इस गतिरोध को कैसे तोड़ते हैं.