फिलिस्तीनियों के लिए मौत की सजा तय, इजराइल संसद में 62 वोटों से पास हुआ विवादित कानून
इजराइल की संसद ने एक कानून पास किया है, जिसमें वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों के लिए आतंकवादी मामलों में मौत की सजा अनिवार्य की गई है.
नई दिल्ली: इजराइल की संसद ने एक विवादास्पद कानून पास किया गया है, जिसके तहत घातक आतंकवादी हमलों के दोषी पाए गए वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों के लिए मौत की सजा को अनिवार्य बनाया गया है. इस बिल को 62-48 मतों से पारित किया गया, जिसे इजराइल की राजनीति में एक बड़ा और संवेदनशील फैसला माना जा रहा है.
इस कानून को इतामार बेन गिवीर की पार्टी ओत्जमा येहुदित की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. बेन गिवीर ने इस फैसले को पीड़ितों के लिए न्याय का दिन बताया और कहा कि आतंकवाद चुनने वालों के लिए अब साफ संदेश है कि उन्हें मौत का सामना करना पड़ेगा.
पीएम बेंजामिन नेतन्याहू किस पक्ष में हैं?
इस विधेयक के पक्ष में पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने भी मतदान किया. करीब 12 घंटे तक चली बहस के बाद यह कानून पारित हुआ, जिसमें कई दक्षिणपंथी दलों ने समर्थन दिया. इस फैसले को लंबे समय से दक्षिणपंथी नेताओं की प्राथमिकता माना जा रहा था.
क्या है नया कानून?
नए कानून के अनुसार सैन्य अदालतों द्वारा आतंकवादी हमलों में दोषी ठहराए गए वेस्ट बैंक के निवासियों के लिए फांसी डिफॉल्ट सजा होगी. हालांकि न्यायाधीश ‘विशेष परिस्थितियों’ में आजीवन कारावास का विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं. खास बात यह है कि इस फैसले के लिए न्यायाधीशों की सर्वसम्मति जरूरी नहीं होगी, बल्कि साधारण बहुमत से भी मौत की सजा दी जा सकेगी.
किसपर लागू होगा ये कानून?
इस कानून में अपील के अधिकार को भी सीमित कर दिया गया है, जिससे यह और अधिक सख्त बन गया है. हालांकि यह कानून पिछली घटनाओं पर लागू नहीं होगा, जिसमें 7 अक्टूबर के हमलों के आरोपी भी शामिल हैं. उनके लिए अलग विधेयक लाने की बात कही गई है.
यह कानून मुख्य रूप से फिलिस्तीनियों पर लागू होगा, क्योंकि वेस्ट बैंक के लोगों पर सैन्य अदालतों में मुकदमा चलता है, जबकि इजराइली नागरिकों पर सिविल अदालतों में सुनवाई होती है. इस वजह से इस कानून को भेदभावपूर्ण भी बताया जा रहा है.
इस फैसले का क्यों हो रहा विरोध?
इस फैसले का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने इस कानून को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में मौत की सजा का समर्थन नहीं किया जा सकता.
आलोचकों का कहना है कि यह कानून नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है और क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है. वहीं समर्थकों का मानना है कि यह कदम आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश देने के लिए जरूरी है.
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