इजरायल में आम चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर गतिरोध बना हुआ है. किसी भी प्रमुख गठबंधन को संसद में बहुमत नहीं मिलने के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने राजनीतिक दलों से मिलकर सरकार बनाने की अपील की है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, हर्जोग ने बुधवार को अपने आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि सभी दलों को दोबारा चुनाव से बचने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बातचीत के लिए आने वाले नेताओं को खुले मन से चर्चा करनी चाहिए.
Israeli President Isaac Herzog: We must do everything possible, especially after yesterday, to avoid another election. I expect everyone who comes here to come with an open mind. https://t.co/h0xD6jJFun
— Tabz (@TabzLIVE) October 28, 2026Also Read
इजरायली समाचार वेबसाइट Ynet के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के खाते में 48 सीटें आई हैं. अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को 19 सीटें मिलने का अनुमान है. इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. फिलहाल कोई भी प्रमुख गठबंधन इस आंकड़े तक नहीं पहुंचा है.
चुनाव की मतगणना अभी जारी है. सैनिकों और अपने निर्धारित मतदान केंद्रों से बाहर वोट डालने के पात्र लोगों के कुछ मतों की गिनती बाकी है. इन्हें विशेष डबल-लिफाफा मतपत्रों के रूप में गिना जाता है. ऐसे 4.8 लाख से अधिक मतपत्रों की गिनती होनी है, जिससे सीटों के आंकड़ों में बदलाव संभव है. इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, मतगणना शुक्रवार तक चल सकती है.
हर्जोग ने कहा कि उन्हें अगले सप्ताह आधिकारिक चुनाव नतीजे मिलेंगे. इसके बाद वह राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा करेंगे. फिर उस सांसद को सरकार बनाने का मौका दिया जाएगा, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे बेहतर संभावना होगी. उस नेता को सरकार बनाने के लिए शुरुआती 28 दिन मिलेंगे. जरूरत पड़ने पर 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दी जा सकती है. यदि पहला उम्मीदवार नाकाम रहता है, तो किसी अन्य सांसद को मौका मिल सकता है. किसी के भी बहुमत जुटाने में असफल रहने पर दोबारा चुनाव कराना पड़ सकता है.
अरब नेतृत्व वाली पार्टियों में जॉइंट लिस्ट और मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली राअम शामिल हैं. एक की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ने आइजेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार को किसी रूप में समर्थन देने की संभावना जताई है, लेकिन गठबंधन सरकार में शामिल होने का पक्का वादा नहीं किया है. जॉइंट लिस्ट ने नेतन्याहू की जगह बनने वाली सरकार को बाहर से समर्थन देने का विकल्प रखा है. राअम ने भी विपक्षी गठबंधन के साथ काम करने की इच्छा जताई है. हालांकि, नेतन्याहू अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर रहने से इनकार कर चुके हैं.
एक विकल्प नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और आइजेनकोट के विपक्षी गठबंधन के बीच राष्ट्रीय एकता सरकार बनाना भी है. लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को अपने राजनीतिक मतभेद दूर करने होंगे. नेतन्याहू को ऐसी सरकार बनाने के लिए अपने दक्षिणपंथी और अति-रूढ़िवादी सहयोगियों से दूरी बनानी पड़ सकती है. इनमें इतामार बेन-ग्विर और बेजालेल स्मोट्रिच से जुड़ी पार्टियां भी शामिल हैं. वहीं, विपक्ष के कुछ नेता नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के वादे के साथ चुनाव मैदान में उतरे थे, इसलिए इस विकल्प का विरोध भी हो सकता है.
अगर कोई गठबंधन बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो नई सरकार के कार्यभार संभालने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे. राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बनने पर देश में फिर चुनाव कराने की नौबत आ सकती है. इजरायल में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बहुमत को लेकर असहमति के कारण कई बार चुनाव हो चुके हैं.