नई दिल्ली: अफ्रीकी देश सूडान में गृहयुद्ध जारी है. दक्षिण-पश्चिमी सूडान के दक्षिण दारफुर प्रांत की राजधानी न्याला के एक मार्केट पर ड्रोन से हमला किया गया. इस हमले में 100 से ज्यादा लोगों की मौत होने और 113 लोगों के घायल होने की खबर है. मृतकों और घायलों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की बताई जा रही है. इस घटना ने युद्ध के बीच आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स ने मंगलवार को एक बयान जारी किया है. उन्होंने इस हमले के लिए सूडानी सेना को जिम्मेदार ठहराया. संगठन के मुताबिक, हमला सोमवार शाम को हुआ था. हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है. संगठन ने घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
हमले के बाद बाजार में भारी तबाही मच गई. जहां लोग रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने पहुंचे थे, वहीं कुछ ही देर में वहां चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया. मानवाधिकार संगठन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हमलों से आम लोगों की जान को गंभीर खतरा पैदा होता है.
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) ने भी न्याला में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की जानकारी दी. संगठन के अनुसार, उसके अस्पताल में 36 शव लाए गए थे, जबकि इमरजेंसी विभाग में 150 घायल पहुंचे थे. अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों और घायलों की संख्या में अंतर है, इसलिए अंतिम आंकड़े की पुष्टि जरूरी है.
सूडान में जारी युद्ध के दौरान बाजारों, अस्पतालों, स्कूलों और विस्थापित लोगों के शिविरों जैसे नागरिक ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आती रही हैं. विस्फोटकों से लैस ड्रोन दूर से हमला करने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने का खतरा रहता है.
संयुक्त राष्ट्र ने भी सूडान में आम नागरिकों की बिगड़ती स्थिति और मानवीय संकट पर चिंता जताई है. न्याला में हुए ताजा हमले के बाद नागरिकों की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है.