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India Daily

चीन के मीडिया में भी ITBP चीफ के बयान की चर्चा, कहा- ये भारत की रणनीतिक चाल

हॉन्गकॉन्ग से प्रकाशित साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने इस घटनाक्रम को भारत और चीन के बीच रिश्तों में आई नाजुक गर्मजोशी के लिए चुनौती बताया है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
चीन के मीडिया में भी ITBP चीफ के बयान की चर्चा, कहा- ये भारत की रणनीतिक चाल
Courtesy: X

अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन के टकराव की खबरों पर चीन का मीडिया भारत को ही दोष दे रहा है. चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में भारत के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे भारत की घरेलू राजनीति से जुड़ी रणनीति करार दिया है.

वहीं चीन के एक अन्य अखबार और हॉन्गकॉन्ग से प्रकाशित साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने इस घटनाक्रम को भारत और चीन के बीच रिश्तों में आई नाजुक गर्मजोशी के लिए चुनौती बताया है.

चीन की  सरकार के मुख्तपत्र ग्लोबल टाइम्स ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन के हवाले से कहा कि चीन दोनों देशों के बीच हुए प्रासंगित समझौतों और साझा सहमतियों का सख्ती से पालन करता है. उन्होंने कहा कि चीनी सेना अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता की रक्षा के लिए सामान्य गश्त और नियंत्रण गतिविधियां संचालित करती है.


चीन के विदेश मंत्रालय का बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने कहा था कि बॉर्डर पर स्थिति तब बिगड़ती है जब चीन की सेना गश्त के तय तौर तरीकों को तोड़ती है.

भारत के विदेश मंत्रालय का यह बयान ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर द्वारा 22 अक्तूबर को एक कार्यक्रम में दिए उस बयान के बाद आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ दिनों से अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर फेस-ऑफ की स्थिति बनी और यह जारी है. उनके इस बयान ने पूरे देश का ध्यान अपनी और खींचा. विपक्ष ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया जिसके बाद भारत सरकार को इस पर सफाई देनी पड़ी थी.

त्सिंघुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के रिसर्च डिपार्टमेंट के निदेशक कियान फेंग ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि भारतीय पक्ष द्वारा सार्वजनिक रूप से लगाए गए निराधार आरोप, गश्त से जुड़े मुद्दों पर एक सोची-समझी रणनीतिक चाल थी. इसमें कुछ हद तक घरेलू राजनीतिक समीकरण भी शामिल थे लेकिन साथ ही मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों से आगे की बातचीत की गुंजाइश भी बनी थी.

कियान ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने का जिम्मा भारत पर डालते हुए कहा कि सीमा संबंधी मुद्दों को द्विपक्षीय संबंधों में आ रहे सुधार की गति में बाधा बनने से  रोकने के लिए भारत को सीमा प्रबंधन से जुड़े मौजूदा समझौतों का पालन करना चाहिए. लेख में कहा गया कि दोनों पक्षों को अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए स्थापित राजनयिक और सैन्य संवाद तंत्रों का उपयोग जारी रखना चाहिए ताकि ऐसी किसी भी गलतफहमी से बचा जा सके जिसका असर व्यापक रूप से दोनों देशों के संबंधों पर पड़े.

वहीं हॉन्गकॉन्ग से प्रकाशित होने वाले अखबार साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने कहा कि चीन और भारत के बीच बनी नाजुक सुलह एक बार फिर से परीक्षा के दौर से गुजर रही है क्योंकि इन दोनों एशियाई पड़ोसियों के बीच विवादित सीमा पर सैन्य टकराव होने की खबरें सामने आई हैं.

अखबार लिखता है कि पिछले एक साल में बीजिंग और नई दिल्ली ने संबंध सुधार की दिशा में कदम उठाए हैं. सैन्य टकराव की घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों को सबसे निचले स्तर पर ला दिया था. पांच साल के अंतराल के बाद पिछले साल अक्तूबर में दोनों देशों के बीच सीधी फ्लाइट सेवा शुरू हुई. वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग साल साल के बाद पिछले महीने ब्रिक्स समिट में शामिल होने भारत पहुंचे और उन्होंने पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की.