संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम उस समय विवाद का केंद्र बन गया जब इजरायल और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच खुली बहस देखने को मिली. संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित इस बैठक का उद्देश्य संवेदनशील मुद्दों पर वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना था, लेकिन कार्यक्रम के दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया.
बैठक में विवाद तब शुरू हुआ जब संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने हाल ही में जारी एक रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए. रिपोर्ट में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के आधार पर इजरायल को संयुक्त राष्ट्र की निगरानी सूची में शामिल किया गया था. इजरायल लंबे समय से इस तरह की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण बताता रहा है और इस बार भी उसने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया.
डैनन ने अपने संबोधन के दौरान रिपोर्ट तैयार करने वाली संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में तथ्यों को एकतरफा ढंग से प्रस्तुत किया गया है और इजरायल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसकी समीक्षा की मांग भी की. इजरायली राजदूत की टिप्पणियों के बाद संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी वैनेसा फ्रेजियर ने हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्ष स्वतंत्र जांच और सत्यापित साक्ष्यों पर आधारित हैं. फ्रेजियर ने संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों पर व्यक्तिगत आरोप लगाने को अनुचित बताते हुए इस पर आपत्ति दर्ज कराई. उनके बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई.
Danny Danon, Israel’s so-called ambassador to the UN, doesn’t defend his regime with facts. When the United Nations added Israel’s army to its blacklist for conflict-related sexual violence alongside ISIS, this arrogant thug shouted “YOU WILL BE QUIET NOW!” at UN staff and… pic.twitter.com/zxp1dmsnqR
— Abilio (@ilbannay) June 19, 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक रिपोर्ट तक सीमित नहीं है. हाल के महीनों में गाजा संघर्ष और उससे जुड़े मानवीय मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र तथा इजरायल के बीच मतभेद लगातार बढ़े हैं. कई रिपोर्टों में नागरिकों, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों से जुड़े मामलों को लेकर चिंता जताई गई है, जबकि इजरायल इन निष्कर्षों को अक्सर पक्षपातपूर्ण बताता रहा है. इसी सप्ताह संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी एक अन्य रिपोर्ट में भी फिलिस्तीनी बच्चों के खिलाफ बढ़ते उल्लंघनों पर चिंता व्यक्त की गई थी. रिपोर्ट में कुछ इजरायली सेटलर समूहों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई गई, जिससे विवाद और गहरा गया.