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India Daily

ईरान को बड़ा झटका! IRGC इंटेलिजेंस चीफ माजिद खादेमी की इजरायली हमले में मौत

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने इंटेलिजेंस प्रमुख माजिद खादेमी की मौत की पुष्टि कर दी है. इजरायली हमलों में हुई इस मौत से ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को गहरा झटका लगा है. 

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
ईरान को बड़ा झटका! IRGC इंटेलिजेंस चीफ माजिद खादेमी की इजरायली हमले में मौत
Courtesy: @AdityaRajKaul

नई दिल्ली: इजरायल के हालिया हमलों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के इंटेलिजेंस चीफ माजिद खादेमी की मौत हो गई है. IRGC ने आधिकारिक रूप से उनकी मौत की पुष्टि की है. खादेमी दशकों से ईरान की सुरक्षा और खुफिया अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे. उनकी मौत से ईरान को बड़ा नुकसान हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ईरानी नेताओं के मारे जाने का दावा किया. यह घटना पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आई है, जब 28 फरवरी 2026 से अमेरिका और इजरायल के संयुक्त ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान पर हमले शुरू हुए थे.

IRGC का आधिकारिक बयान

IRGC ने माजिद खादेमी को ईरान की सुरक्षा और इस्लामिक क्रांति के प्रति समर्पित सैन्य अधिकारी बताया. उन्होंने करीब 50 साल तक देश की रक्षा में सेवा की. बयान में कहा गया कि खादेमी ने विदेशी दुश्मनों और घुसपैठ की साजिशों को नाकाम करने में अहम योगदान दिया. उनके काम को आने वाली इंटेलिजेंस पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक और स्थायी बताया गया है. IRGC ने आगे कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा को अस्थिर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ पूरी सतर्कता बरतेगा और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देगा.

ट्रंप का सोशल मीडिया पोस्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने दावा किया कि तेहरान पर किए गए बड़े हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य नेता मारे गए हैं. उन्होंने इसे ‘बड़ा हमला’ बताया और एक छोटा वीडियो भी शेयर किया जिसमें धमाकों से आसमान जगमगाता दिख रहा था. ट्रंप का यह बयान क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को और भड़काने वाला माना जा रहा है. इससे पहले भी उन्होंने ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने की बात कही थी. 

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के हमले

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया. इसका मकसद ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना था. पहले दिन ही सुप्रीम लीडर अली खामेनेई तेहरान स्थित अपने परिसर पर हुए हवाई हमले में मारे गए. इसके बाद अली लारीजानी, अली शमखानी, IRGC कमांडर, जनरल स्टाफ प्रमुख, बसीज बलों के मुखिया, IRGC नौसेना कमांडर और खुफिया मंत्री समेत कई उच्च अधिकारी हमलों में मारे गए. इन हमलों में मिसाइल बेस और सैन्य कमांड सेंटर भी निशाने पर रहे.

ईरान पर लगातार झटके

इन हमलों से ईरान की सैन्य और राजनीतिक कमान बुरी तरह प्रभावित हुई है. खादेमी की मौत IRGC के इंटेलिजेंस नेटवर्क को और कमजोर कर रही है. ईरान अब अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और जवाबी कार्रवाई की तैयारी में जुटा हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और बिगड़ सकती है. दोनों तरफ से बढ़ती दुश्मनी के कारण पश्चिम एशिया में शांति की संभावनाएं कम होती दिख रही हैं.