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जंग और आर्थिक संकट के बीच इराक को मिला नया राष्ट्रपति, जानें निजार अमेदी के सामने क्या है सबसे बड़ी चुनौती

इराक में निजार अमेदी को नया राष्ट्रपति चुना गया है. यह फैसला युद्ध और आर्थिक संकट के बीच हुआ है. अब उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के चयन और स्थिर सरकार बनाने की होगी.

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Km Jaya

नई दिल्ली: शनिवार को हुए एक मतदान में इराक की संसद ने 'पैट्रियटिक यूनियन ऑफ कुर्दिस्तान' पार्टी के नेता निजार अमेदी को देश का नया राष्ट्रपति चुना. यह चुनाव संसदीय चुनावों के पांच महीने बाद हुआ, जिसमें किसी भी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. उत्तरी इराक के दोहुक प्रांत में जन्मे अमेदी जो पेशे से एक इंजीनियर हैं उन्होंने मतदान के दूसरे दौर में 227 वोट हासिल करके जीत दर्ज की.

अमेदी ने अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों फुआद हुसैन और मुथन्ना अमीन नादेर को बड़े अंतर से हराया. यह मतदान संवैधानिक रूप से निर्धारित समय सीमा से दो महीने बाद हुआ. अब नव-निर्वाचित राष्ट्रपति अगले 15 दिनों के भीतर सबसे बड़े संसदीय गुट के नामित व्यक्ति को सरकार बनाने और प्रधानमंत्री का पद संभालने के लिए आमंत्रित करेंगे.

वर्तमान में कैसी है वहां की स्थिति?

वर्तमान में इराक एक आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिसका कारण ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष है. जो तेल निर्यात में रुकावट और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण पैदा हुआ है.

निजार अमेदी का चुनाव एक संवेदनशील मोड़ पर हुआ है क्योंकि इराक अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए जा रहे संघर्ष के गंभीर परिणामों की मार झेल रहा है. ईरान समर्थित मिलिशिया ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं. इसके जवाब में अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हवाई हमलों में इराकी सैनिकों की भी मौत हुई है. 

इस बढ़ते तनाव और साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की वजह से उन्होंने इराक के तेल निर्यात को पूरी तरह से ठप कर दिया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है.

निजार अमेदी को कितना है राजनीति में अनुभव?

पेशे से इंजीनियर निजार अमेदी इराकी राजनीति के एक अनुभवी दिग्गज हैं. उन्होंने पहले दो पूर्व इराकी राष्ट्रपतियों जलाल तालाबानी और फुआद मासूम के सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. अमेदी ने पहले दौर में ही 208 वोट हासिल करके अपनी मजबूत स्थिति का प्रदर्शन कर दिया था. इसके बाद वोटिंग के दूसरे दौर में लागू होने वाले साधारण बहुमत के नियम ने उनकी जीत पक्की कर दी. 

प्रधानमंत्री पद को लेकर क्यों है सस्पेंस?

इराक में परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति का पद किसी कुर्द के पास, प्रधानमंत्री का पद किसी शिया के पास और स्पीकर का पद किसी सुन्नी के पास होता है. अब सबकी नजरें प्रधानमंत्री पद के लिए होने वाले नामांकन पर टिकी हैं. ईरान समर्थक 'शिया कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क' ने नूरी अल-मलिकी का नाम आगे बढ़ाया है. एक ऐसा कदम जिसका वॉशिंगटन विरोध कर रहा है. अब यह राष्ट्रपति को तय करना है कि वे अल-मलिकी को सरकार बनाने का मौका देंगे या फिर कोई नया चेहरा सामने आएगा.