नई दिल्ली: पश्चिमी एशिया में बढ़ते युद्ध के खतरों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है. ट्रंप ने दुनिया के उन सभी देशों को आगाह किया है जो ईरान को हथियार मुहैया करा रहे हैं. राष्ट्रपति की इस घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है क्योंकि इसमें कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की बात है. हालांकि, ईरान की ओर से पेश किए गए शांति प्रस्ताव ने फिलहाल तनाव को कम करने का काम किया है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट साझा करते हुए उन देशों को सीधे तौर पर निशाना बनाया है जो ईरान की सैन्य शक्ति बढ़ा रहे हैं. राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई देश ईरान को हथियारों की आपूर्ति करता है, तो अमेरिका उसके सामान पर तुरंत 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा देगा. ट्रंप का यह संदेश वैश्विक स्तर पर उन देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है जिनके अमेरिका के साथ गहरे व्यापारिक संबंध हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि इस 50 प्रतिशत के शुल्क में किसी भी प्रकार की छूट या अपवाद की कोई गुंजाइश नहीं होगी. उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में 'DJT' के हस्ताक्षर के साथ घोषणा की कि यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा. ट्रंप की यह कठोर नीति संकेत देती है कि अमेरिका अब उन देशों के प्रति कतई नरम नहीं रहेगा जो ईरान के साथ सैन्य गठबंधन बनाकर अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं.
ट्रंप की इस नई टैरिफ नीति ने अंतरराष्ट्रीय बाजार और व्यापार विशेषज्ञों की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं. यदि यह चेतावनी हकीकत में बदलती है, तो इससे न केवल वैश्विक व्यापार प्रवाह बुरी तरह प्रभावित होगा, बल्कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच पहले से ही नाजुक चल रहे संबंध और भी तनावपूर्ण हो सकते हैं. टैरिफ का यह बोझ अंततः उपभोक्ता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा, जिससे दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन सकता है.
एक ओर जहां ट्रंप आर्थिक मोर्चे पर आक्रामक हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध के मैदान में शांति के कुछ संकेत भी मिले हैं. राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ होने वाले बड़े सैन्य हमलों को फिलहाल टालने का फैसला किया है और दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर अपनी सहमति दी है. इसके जवाब में ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य को सशर्त रूप से फिर से खोलने का वादा किया है, जो दुनिया के तेल व्यापार के लिए एक जीवनरेखा माना जाता है.
तनाव में आई इस मामूली कमी की मुख्य वजह ईरान द्वारा पेश की गई वह शांति योजना है जिसे ट्रंप ने 'व्यावहारिक' माना है. इसी प्रस्ताव के आधार पर अमेरिका ने ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की अपनी योजना को फिलहाल रोक दिया है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच गहन चर्चा होगी. अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो पश्चिमी एशिया को विनाशकारी युद्ध की आग से बचाया जा सकता है.