अमेरिका-ईरान के बीच तनाव शुरू हुए अब सात महीने हो चुके हैं. ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार याह्या रहीम सफवी ने अब एक नई चेतावनी दी है. उनके इस चेतावनी से क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और भारत सहित आसपास के देशों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हुई हैं.
ईरानी सैन्य सलाहकार याह्या रहीम सफवी ने कहा है कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से शुरू हुआ संघर्ष अब लाल सागर तक पहुंच चुका है. अगर अमेरिका की ओर से फिर सैन्य कार्रवाई होती है तो इसका अगला विस्तार हिंद महासागर तक हो सकता है. उनका यह बयान ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स की ओर से जारी वीडियो में सामने आया.
हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है. यह पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है. ईरान की चेतावनी में हिंद महासागर का उल्लेख होने के बाद इस बेस की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हुई है. हालांकि, यह कहना कि ईरान ने डिएगो गार्सिया को निशाना बनाने की योजना घोषित कर दी है, उपलब्ध बयानों से साबित नहीं होता. फिलहाल तेहरान की ओर से व्यापक रूप से संघर्ष का दायरा बढ़ाने की चेतावनी दी गई है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो अमेरिका के लिए मुसीबत बढ़ सकती है. वहीं अमेरिका में होने वाले मीडटर्म चुनाव डोनाल्ड ट्रंप के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
हिंद महासागर भारत के समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है. पश्चिम एशिया से आने वाले ऊर्जा मार्गों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात पर किसी भी तरह का सैन्य तनाव परिवहन और व्यापार को प्रभावित कर सकता है. भारतीय समुद्री हितों को देखते हुए ईरान की ताजा चेतावनी पर क्षेत्रीय देशों की नजर बनी हुई है. फिलहाल ईरान की ओर से दी गई चेतावनी को संभावित विस्तार की धमकी के तौर पर देखा जा रहा है. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि संघर्ष वास्तव में हिंद महासागर तक किस स्तर पर फैलता है.