menu-icon
India Daily

अमेरिका को भनक तक नहीं, ईरान चुपके से कर रहा ये काम, सैटेलाइट ट्रैकर से हुआ खुलासा

सैटेलाइट निगरानी करने वाली कंपनी के अनुसार ईरान युद्ध के बीच भी होर्मुज जलडमरूमध्य से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल भेज रहा है. अब तक लगभग 11 से 12 मिलियन बैरल तेल इस अहम समुद्री रास्ते से गुजर चुका है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
अमेरिका को भनक तक नहीं, ईरान चुपके से कर रहा ये काम, सैटेलाइट ट्रैकर से हुआ खुलासा
Courtesy: @visionergeo

मध्य पूर्व में जारी तनाव और समुद्री गतिविधियों पर बढ़ती निगरानी के बीच एक नई जानकारी सामने आई है. सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने वाली कंपनी TankerTrackers.com का कहना है कि संघर्ष की स्थिति के बावजूद ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखे हुए है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है. रिपोर्ट के अनुसार फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से लाखों बैरल तेल इस मार्ग से भेजा जा चुका है.

सैटेलाइट निगरानी से सामने आई जानकारी

समुद्री जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली कंपनी TankerTrackers.com सैटेलाइट चित्रों के माध्यम से जहाजों की आवाजाही का अध्ययन करती है. कंपनी के सह-संस्थापक समीर मदानी के अनुसार ईरान ने संघर्ष शुरू होने के बाद से कम से कम 11 से 12 मिलियन बैरल कच्चा तेल इस जलमार्ग से भेजा है. हालांकि उनका कहना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक भी हो सकता है, क्योंकि मौजूदा हालात में सैटेलाइट डेटा प्राप्त करने में कुछ देरी हो रही है.

होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है. फारस की खाड़ी के कई तेल उत्पादक देश इसी रास्ते से अपने तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाते हैं. हालिया संघर्ष के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है. कई जहाजों ने सुरक्षा कारणों से यात्रा रोक दी है, जिससे तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ने लगा है.

तेल कीमतों में तेज उछाल

संघर्ष की खबरों और जहाजों की सीमित आवाजाही के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई. सोमवार को कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री परिवहन लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है. इससे तेल आयात करने वाले देशों पर भी आर्थिक दबाव पड़ सकता है.

जहाजों की गतिविधियों पर विशेष नजर

रिपोर्ट के अनुसार कुछ जहाज अपनी डिजिटल ट्रांसपोंडर प्रणाली बंद करके भी यात्रा कर रहे हैं ताकि उनकी लोकेशन आसानी से ट्रैक न हो सके. उदाहरण के तौर पर एक ग्रीक कंपनी द्वारा संचालित तेल टैंकर फारस की खाड़ी से होर्मुज के रास्ते बाहर निकला और कुछ समय तक उसका सिग्नल बंद रहा. बाद में वही जहाज भारत के तट के पास फिर से दिखाई दिया. इससे समुद्री गतिविधियों की निगरानी और जटिल हो गई है.