'गुजरने की कोशिश की तो जहाजों में लगा देंगे आग', ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का किया ऐलान

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट शिपिंग ट्रैफिक के लिए बंद करने की घोषणा की है. अमेरिका ने इस घोषणा को मानने से इंकार किया है.

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Shanu Sharma

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मिडिल ईस्ट में उथल-पुथल मचा दी है. इसी बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स सोमवार को यह घोषणा की है कि होर्मुज स्ट्रेट शिपिंग ट्रैफिक के लिए बंद किया गया है. इतना ही नहीं ईरान की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि इस स्ट्रेटेजिक वॉटरवे से गुजरने की कोशिश करने पर जहाजों में आग लगा दिया जाएगा.

गार्ड्स कमांडरइनचीफ के सीनियर सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जबारी ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि स्ट्रेज बंद है और अगर कोई भी इसको पास करने की कोशिश करेगा तो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के हीरो और रेगुलर नेवी उन जहाजों को आग के हवाले कर देंगे.

खामेनेई की मौत के बाद बढ़ा तनाव

ईरान द्वारा यह घोषणा उनके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद की गई है. खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए ज्वाइंट ऑपरेशन के दौरान हुई. हालांकि ईरान की इस चेतावनी पर अमेरिका ने भी प्रतिक्रिया दी है. US सेंट्रल कमांड ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है.

उन्होंने ईरानी अधिकारियों के इस दावे को गलत बताया. होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी का संकरा मुहाना है, जिससे दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है. इस स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकर सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, UAE और ईरान से तेल और गैस पूरी दुनिया में सप्लाई करता है. सबसे ज्यादा सप्लाई एशियाई देशों में की जाती है. इस रूट के बंद होने से तेल व्यापार को भारी नुकसान पहुंच सकता है.

होर्मुज स्ट्रेट पर क्यों बढ़रहा तनाव?

होर्मुज स्ट्रेट एक बहुत ही पतला और घुमावदार पानी का रास्ता है, जो लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है. जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से और वहां से ग्लोबल समुद्री रास्तों से जोड़ता है. ईरान और ओमान इस रास्ते के साथ-साथ पानी के इलाके को भी कंट्रोल करते हैं. इंटरनेशनल शिप के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता है. यह चैनल लंबे समय से ग्लोबल ट्रेड का सेंटर रहा है. तेल से पहले, सिल्क, सिरेमिक और टेक्सटाइल जैसे सामान एशिया से इसी रास्ते से एक्सपोर्ट होते थे.

आज इसे एनर्जी एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा रास्ता माना जाता है. इस रास्ते से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, UAE और ईरान से तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस ले जाते हैं. ईरान ने इससे पहले भी फरवरी में मिलिट्री एक्सरसाइज के दौरान स्ट्रेट के कुछ हिस्सों में कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोक दिया था. जिसका असर कई देशों के तेल की कीमतों पर देखने  को  मिला था. हालांकि ईरान की इस घोषणा के बाद तनाव और भी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है.