नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक प्रयास को बड़ा झटका लगा है. ईरान ने पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच लगभग दो महीने से जारी संघर्ष को रोकने के लिए युद्धविराम लागू है. इस वार्ता से उम्मीद थी कि हालात में सुधार होगा, लेकिन ईरान के रुख ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है.
ईरान की सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि वह इस अहम बैठक में हिस्सा नहीं लेगा. यह बैठक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित थी. अमेरिका की ओर से पहले ही संकेत दिए गए थे कि उसके अधिकारी वार्ता के लिए पहुंचेंगे. ऐसे में ईरान का अचानक पीछे हटना कूटनीतिक स्तर पर बड़ा झटका माना जा रहा है.
ईरान ने अपने फैसले के पीछे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है. उसने कहा कि वाशिंगटन की मांगें जरूरत से ज्यादा हैं और उसका रवैया लगातार बदलता रहता है. ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी युद्धविराम का उल्लंघन है. इन कारणों से वार्ता का माहौल खराब हुआ है.
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरिफ ने अमेरिका की नीति की आलोचना की. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका का रुख अस्थिर और विरोधाभासी है. उनके मुताबिक पहले दबाव बनाकर बातचीत की कोशिश की जाती है और फिर अचानक सख्त रुख अपनाया जाता है. इसे उन्होंने गैरजिम्मेदाराना व्यवहार बताया.
दूसरी ओर अमेरिका ने इस वार्ता को लेकर अपनी तैयारियां जारी रखी थीं. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अधिकारी इस्लामाबाद जाने वाले थे. पाकिस्तान ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी. लेकिन ईरान के फैसले के बाद अब इन तैयारियों का कोई मतलब नहीं रह गया है.
इस घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम पर खतरा मंडराने लगा है. यह युद्धविराम 22 अप्रैल तक लागू है और इसे आगे बढ़ाने के लिए बातचीत जरूरी मानी जा रही थी. अब जब वार्ता ही नहीं होगी, तो तनाव बढ़ने की आशंका और गहरी हो गई है.