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'दंगाइयों को उनकी जगह दिखाएंगे', ईरान में भड़के जनआक्रोश पर खामेनेई की कड़ी चेतावनी, विदेशी ताकतों के हाथ का लगाया आरोप

ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने दंगाइयों को चेतावनी दी और विदेशी ताकतों का हाथ होने का आरोप लगाया. प्रदर्शनकारी महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'दंगाइयों को उनकी जगह दिखाएंगे', ईरान में भड़के जनआक्रोश पर खामेनेई की कड़ी चेतावनी, विदेशी ताकतों के हाथ का लगाया आरोप
Courtesy: social media

नई दिल्ली: ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और कमजोर होती अर्थव्यवस्था के खिलाफ जनता ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया है. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से दंगाइयों को चेतावनी दी है. साथ ही उन्होंने विदेशी ताकतों का भी आरोप लगाया. देश के 90 शहरों और कस्बों में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं, जिसमें अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है. खामेनेई का यह संदेश ईरान के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में भारी प्रभाव डाल रहा है.

सुप्रीम लीडर का कड़ा संदेश

अयातुल्ला खामेनेई ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारी और दंगाई अलग हैं. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मांग सुनी जा सकती है, लेकिन दंगाइयों से किसी तरह की बातचीत का कोई फायदा नहीं है. खामेनेई ने धमकी दी कि दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी होगी और वे इस मामले में सख्त कदम उठाएंगे.

प्रदर्शन और हताहतों की स्थिति

ईरान में पिछले एक हफ्ते से विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं. अब तक कम से कम 10 लोग हिंसक झड़पों में मारे जा चुके हैं. ये प्रदर्शन देश की खराब आर्थिक स्थिति, मुद्रा रियाल के गिरते मूल्य और बढ़ती महंगाई के खिलाफ शुरू हुए थे. धीरे-धीरे सरकार विरोधी नारे भी सुनाई देने लगे. इस बीच, 90 से अधिक शहरों और कस्बों में लोग सड़कों पर हैं.

विदेशी ताकतों पर आरोप

खामेनेई ने अमेरिकी और इजरायली हस्तक्षेप का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग विदेशी सहायता या पैसे के जरिए सरकार और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ माहौल बना रहे हैं. खामेनेई ने इसे सबसे गंभीर मामला बताया और चेताया कि दुश्मनों की मंशा विफल होगी.

अमेरिका का दबाव और ईरानी प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान प्रदर्शनकारियों को कुचलता है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा. ईरान ने इसे गैरकानूनी और अस्वीकार्य बताया. संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राजदूत ने ट्रंप की धमकियों की निंदा करने की मांग की, जबकि सुरक्षा परिषद के सचिव ने क्षेत्रीय अराजकता की आशंका जताई.

2022 के बाद सबसे बड़े प्रदर्शन

मौजूदा विरोध-प्रदर्शन 2022 के महसा अमीनी के मामले के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं. उस समय हिजाब विवाद में गिरफ्तारी और उनकी मौत के बाद देशभर में आंदोलन फैला था. मौजूदा प्रदर्शन अभी उतने व्यापक नहीं हैं, लेकिन सरकार के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं.