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India Daily

'यहां पैदा होने वाला हर बच्चा कर्जदार...', लश्कर कमांडर ने पाकिस्तान की कंगाली का उड़ाया मजाक

पाकिस्तान की बदहाली और आर्थिक तंगहाली का आलम यह है कि अब वहां के पाले हुए आतंकी संगठन भी सरकार को चोर और भिखारी बताने लगे हैं.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
'यहां पैदा होने वाला हर बच्चा कर्जदार...', लश्कर कमांडर ने पाकिस्तान की कंगाली का उड़ाया मजाक
Courtesy: X

नई दिल्लीः पाकिस्तान की बदहाली और आर्थिक तंगहाली का आलम यह है कि अब वहां के पाले हुए आतंकी संगठन भी सरकार को चोर और भिखारी बताने लगे हैं. प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर कमांडर मोहम्मद अशफाक राणा ने एक सार्वजनिक जलसे में अपनी ही सरकार के खिलाफ जहर उगला है. राणा का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह पाकिस्तान के कर्ज में डूबे होने और प्रशासनिक विफलताओं पर तंज कसता नजर आ रहा है.

दुनिया का कोई देश नहीं बचा जिससे उधार न लिया हो

अशफाक राणा ने पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क बन गया है जिसकी झोली हर किसी के सामने फैली हुई है. उसने कहा, "शायद ही दुनिया का कोई कोना या कोई ऐसा देश बचा हो जिससे पाकिस्तान ने कर्ज न लिया हो.

हमने अमेरिका, चीन, सऊदी अरब, यूएई (UAE), मलेशिया जैसे देशों से लेकर वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ (IMF) तक, सबसे भीख मांग ली है." राणा ने आगे एक बेहद डरावनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि पाकिस्तान में आज जो बच्चा पैदा हो रहा है, वह खुशियां नहीं बल्कि भारी कर्ज का बोझ लेकर दुनिया में आ रहा है. उसके अनुसार, देश का हर नागरिक और आने वाली नस्लें जन्म से ही कर्जदार हैं.

पंजाब और बलूचिस्तान से की तुलना

आतंकी कमांडर ने केवल अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के आंतरिक हालातों पर भी सरकार को घेरा. उसने पंजाब प्रांत की तुलना बलूचिस्तान की बदहाली से करते हुए हुक्मरानों को चोर करार दिया. राणा ने आरोप लगाया कि अगर विदेशों से लिया गया यह अरबों का कर्ज देश के विकास और बुनियादी ढांचे पर खर्च किया गया होता, तो आज पाकिस्तान कई विकसित देशों की कतार में खड़ा होता. भ्रष्टाचार और गलत नीतियों ने मुल्क को बर्बाद कर दिया है.

क्या है इस बयान के मायने?

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक आतंकी कमांडर का सार्वजनिक रूप से सरकार को कोसना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान के भीतर असंतोष किस कदर बढ़ चुका है. जब सरकार आतंकियों की वित्तीय मांगों को पूरा करने में असमर्थ होती है या अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उन पर कुछ पाबंदियां लगाती है, तो इस तरह के फ्रस्ट्रेशन वाले बयान सामने आते हैं.