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पाकिस्तान के जरिए अमेरिका से बात करने को राजी हो सकता है ईरान, बस माननी होंगी ये पांच शर्तें

ईरान का कहना है कि अगर उसकी पांच शर्तें मान ली जाएं तो वह पाकिस्तान के जरिए अमेरिका से संघर्षविराम पर बातचीत के लिए राजी हो सकता है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
पाकिस्तान के जरिए अमेरिका से बात करने को राजी हो सकता है ईरान, बस माननी होंगी ये पांच शर्तें
Courtesy: pinterest

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीति का एक नया रास्ता खुलता नजर आ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका से सीधे नहीं, बल्कि पाकिस्तान के माध्यम से बातचीत के लिए सैद्धांतिक सहमति दी है. हालांकि इसके लिए उसने कुछ सख्त शर्तें रखी हैं, जिनमें हमलों को तुरंत रोकना और भविष्य में सुरक्षा की गारंटी शामिल है. इस संभावित पहल को क्षेत्र में शांति बहाली के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

ईरान की पांच प्रमुख शर्तें

सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने किसी भी मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने से पहले पांच स्पष्ट शर्तें रखी हैं. सबसे अहम मांग तत्काल हमलों पर रोक और भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचने की गारंटी है. इसके अलावा ईरान चाहता है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र उसकी चिंताओं को बातचीत में प्रमुखता से उठाएं और अमेरिका से ठोस जवाब सुनिश्चित करें.

इस्लामाबाद बैठक का महत्व

इन शर्तों पर चर्चा के लिए इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हो रही है, जिसमें चार देशों के विदेश मंत्री शामिल हैं. इस बैठक में एक संभावित मध्यस्थता ढांचे और आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा. माना जा रहा है कि यदि इन देशों के बीच सहमति बनती है, तो यह वार्ता आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है.

पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका

पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है. प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री स्तर पर ईरान और अन्य देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है. कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संवाद को बढ़ावा देने और तनाव कम करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है.

आगे की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान की शर्तों पर सहमति बनती है, तो संघर्ष में अस्थायी विराम संभव है. यह 31 मार्च से 7 अप्रैल के बीच हो सकता है. हालांकि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और सहयोगी देश ईरान की मांगों को कितनी गंभीरता से लेते हैं. फिलहाल सभी की नजर इस्लामाबाद में जारी वार्ता पर टिकी है.