नई दिल्ली: ईरान में अमेरिका और इजरायल के संभावित हमले के खिलाफ एक बड़ा जन आंदोलन शुरू हो गया है. सरकार के ‘जां फिदा’ अभियान में करोड़ों लोग देश के लिए जान देने को तैयार बताए जा रहे हैं. बिजली संयंत्रों की रक्षा के लिए मानव श्रृंखला बनाई गई. इसी बीच कल से अमेरिका के साथ शांति वार्ता का दूसरा दौर शुरू होने वाला है. ट्रंप की धमकी के बावजूद ईरान की जनता और सेना दोनों पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं.
ईरान सरकार ने ‘जां फिदा’ नाम से एक व्यापक अभियान चलाया. ऑनलाइन और एसएमएस के जरिए लोगों से अपील की गई कि वे देश की रक्षा के लिए आगे आएं. अधिकारियों का दावा है कि डेढ़ से दो करोड़ लोग इस अभियान में शामिल होने को तैयार हैं.
जां फिदा अभियान अभियान का मतलब है जीवन का बलिदान या पूरा समर्पण. पहले चरण में बिजली संयंत्रों के आसपास मानव श्रृंखला बनाई गई. युवा, महिलाएं और आम नागरिक इन श्रृंखलाओं में खड़े होकर दुश्मन को संदेश दे रहे हैं कि वे अपनी जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा करेंगे. शीर्ष अधिकारी भी कह रहे हैं कि वे कुर्बानी देने को तैयार हैं. यह अभियान सिर्फ प्रदर्शन नहीं बल्कि बाहरी खतरे के खिलाफ एकजुटता दिखाने का माध्यम बन गया है.
ईरान को सालों पहले ही अमेरिका और इजरायल के हमले का अंदेशा था. इसलिए उसने रूस और ताजिकिस्तान में ड्रोन उत्पादन शुरू कर दिया. ताजिकिस्तान में अबाबिल ड्रोन फैक्ट्री लगाई गई जबकि रूस में शाहेद ड्रोन के लिए मदद की. आईआरजीसी ईरान की सबसे ताकतवर सेना है जो ड्रोन और मिसाइलों को नियंत्रित करती है. देश में समानांतर सेनाएं चल रही हैं जो सीधे सर्वोच्च नेता के अधीन काम करती हैं. मिसाइलों को अलग-अलग बंकरों में छिपाकर रखा गया ताकि दुश्मन को उनका पता न चले. ये सब तैयारियां इसलिए की गईं कि अगर अंदरूनी उत्पादन केंद्र नष्ट हो जाएं तो भी हथियारों की सप्लाई जारी रहे.
ईरान ने इस युद्ध में होर्मुज जलडमरूमध्य को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. दुनिया का प्रमुख तेल-गैस मार्ग अगर बंद हो जाए तो पूरी दुनिया प्रभावित होती है. ईरान ने साफ संकेत दिया कि लंबा युद्ध होने पर वह इस रास्ते को बंद कर सकता है. इससे अमेरिका पर दबाव बढ़ गया क्योंकि दुनिया भर के देश जल्द युद्ध खत्म करने की मांग करने लगे. साथ ही ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों और तेल भंडारों पर जवाबी हमले की रणनीति अपनाई. जब भी अमेरिका-इजरायल ईरान के तेल क्षेत्रों पर हमला करते, ईरान खाड़ी देशों पर हमला कर देता. इससे सऊदी, कतर और यूएई जैसे देश अमेरिका पर दबाव बनाने लगे.
कल से ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता का दूसरा दौर शुरू होगा जो मंगलवार तक चल सकता है. ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों को बर्बाद कर देंगे. युद्ध शुरू हुए 50 दिन बीत चुके हैं. ईरान न तो आसानी से जीत सकता है और न हार. लेकिन उसकी रणनीति ने अमेरिका को वार्ता की मेज पर ला दिया है. अब देखना होगा कि जां फिदा अभियान में शामिल करोड़ों लोग आखिरकार किस मोड़ पर खड़े होते हैं.