नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है. हाल के दिनों में हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला तेज हो गया है. इजरायल ने ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाते हुए कई तेल भंडारण स्थलों पर हमला किया, जिससे तेहरान और करज जैसे शहरों में धमाकों की खबरें सामने आईं. दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने चेतावनी दी है कि देश की सैन्य क्षमता इतनी मजबूत है कि वह इस टकराव को महीनों तक जारी रख सकता है.
इजरायल ने हाल ही में ईरान के कई तेल भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया. शनिवार को राजधानी तेहरान और पास के शहर करज में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं. हमलों के बाद कई इलाकों में आग की लपटें और धुएं के बड़े गुबार उठते देखे गए. बताया गया कि इन हमलों का लक्ष्य ईरान की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा ढांचा था, जिससे देश की आर्थिक और रणनीतिक क्षमता पर असर डाला जा सके.
हमलों के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से फैल गए, जिनमें प्रभावित क्षेत्रों में आग और धुआं साफ दिखाई दे रहा है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ जगहों पर धमाके इतने तेज थे कि आसपास की इमारतें भी हिल गईं. इन तस्वीरों और वीडियो ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना संघर्ष को और गंभीर बना सकता है.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने फार्स न्यूज एजेंसी को दिए बयान में कहा कि देश की सशस्त्र सेनाएं लंबे समय तक इस टकराव का सामना करने के लिए तैयार हैं. प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी के अनुसार ईरान मौजूदा स्तर की सैन्य कार्रवाई कम से कम छह महीने तक जारी रखने की क्षमता रखता है. यह बयान क्षेत्र में बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सख्त रुख दिखाते हुए कहा कि ईरान के लिए आगे और 'सरप्राइज' बाकी हैं. उनका संकेत था कि इजरायल आने वाले समय में भी सैन्य दबाव बनाए रखेगा. इसी बीच ईरान ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों से जुड़े 200 से ज्यादा स्थानों को निशाना बनाया है. इससे साफ है कि यह टकराव अभी थमने वाला नहीं है.