US Israel Iran War

डोनाल्ड ट्रंप के अल्टीमेटम पर भी पीछे नहीं हट रहा ईरान, क्या होर्मुज में एक बार फिर से शुरू होने वाली है 'टैंकर वॉर'?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई धमकी पर ईरान का पलटवार आया है. ईरान ने साफ कहा कि अगर उनके पावर प्लांट पर हमले होते हैं, स्टेट्र ऑफ होर्मुज पूरी तरह से बंद हो जाएगा. क्या इसे 'टैंकर वॉर' की आहट समझा जा सकता है?

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Shanu Sharma

मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब खतरनाक मोड़ ले लिया है. अमेरिका द्वारा लगातार ईरान को धमकी दी जा रही है, वहीं ईरान भी कदम वापस लेने के लिए तैयार नहीं है. जिसके कारण एक बार फिर टैंकर वॉर का खतरा बढ़ गया है.

अमेरिका की ओर से चेतावनी दी गई कि अगर हमले नहीं रुके तो ईरान के पावर प्लांट पर हमला होगा, जिससे पूरे ईरान में अंधेरा छा जाएगा. ईरान ने भी उनकी इस धमकी का जवाब दिया है.

ईरान-इराक के बीच युद्ध

ईरान की ओर साफ कहा गया है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने उस अल्टीमेटम पर अमल करते हैं तो स्टेट्र ऑफ होर्मुज को पूरी तरफ से बंद कर दिया जाएगा. यह रुट पूरे विश्व की उर्जा सप्लाई के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण मार्ग है. हालांकि ट्रंप नेतेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए नौसेना तैनात करने का संकेत दिया है. इससे पहले भी 1980 में ऐसा युद्ध हो चुका है. 

1980 में ईरान-इराक के बीच युद्ध शुरू हुआ था. सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया. इराक ने ईरान के तेल टैंकरों और ठिकानों पर हमले शुरू किए, ईरान ने जवाब में इराक को मदद पहुंचाने वाले जहाजों को निशाना बनाया. इसी से 'टैंकर वॉर' शुरू हो गया. खाड़ी में आने-जाने वाले जहाज लगातार हमलों का शिकार बने. जिसके बाद 1986 में कुवैत ने अमेरिका से मदद मांगी. अमेरिका ने कुवैती जहाजों को अपने झंडे तले सुरक्षा दी. 

ईरान के खिलाफ पहले भी अमेरिका का हमला

ईरान ने समुद्र में माइन बिछाईं जिसके कारण कई टैंकर क्षतिग्रस्त हुए. 1988 में अमेरिकी जहाज यूएसएस सैमुअल बी रॉबर्ट्स माइन से टकराया, जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ. जवाब में अमेरिका ने ऑपरेशन प्रेयिंग मैन्टिस शुरू किया. इसमें ईरान के कई ठिकानों, जहाजों और प्लेटफॉर्म पर हमला हुआ. ईरान को बड़ा नुकसान हुआ. हालांकि आज के समय में ईरान के पास आधुनिक मिसाइल, ड्रोन और हथियार हैं. माइन आज भी सबसे बड़ा खतरा हैं. अमेरिका के पास माइन साफ करने के संसाधन सीमित हैं. ट्रंप ने सहयोगी देशों से युद्धपोत मांगे, लेकिन ज्यादा मदद नहीं मिली. ईरान ने दुश्मन देशों के जहाजों को रोक दिया है. जिसके कारण तेल के दाम आसामना छू रहे हैं.