'ट्रंप कौन होते हैं रोकने वाले?', न्यूक्लियर अधिकार पर ईरान की US को दो टूक
ईरान के राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि उनका देश अपने न्यूक्लियर अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा. अमेरिका के दबाव के बीच ईरान बातचीत और ताकत दोनों का संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर चल रहा है.
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एक बार फिर अपने देश का रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान अपने परमाणु अधिकारों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर मुद्दे पर टकराव तेज है. ईरान एक ओर बातचीत की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी ताकत और स्वतंत्रता पर जोर भी देता दिख रहा है.
राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि ईरान क्या कर सकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर ईरान के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है. यह बयान साफ तौर पर अमेरिका के दबाव को चुनौती देता है.
न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अडिग रुख
ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम नहीं कर रहा, लेकिन अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर किसी तरह की रोक नहीं मानेगा. उसका कहना है कि यह उसका वैध अधिकार है. वहीं अमेरिका इस बात पर जोर दे रहा है कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए.
जंग नहीं चाहता ईरान, लेकिन तैयारी पूरी
पेजेशकियान ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता. उन्होंने कहा कि उनका देश शांति चाहता है, लेकिन अगर उस पर दबाव बढ़ाया गया तो वह पीछे नहीं हटेगा. उनके मुताबिक ईरान अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है और सम्मानजनक समाधान चाहता है.
हाल के दिनों में ईरान के भीतर से अलग-अलग तरह के बयान सामने आए हैं. जहां एक ओर विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही, वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सख्त रुख अपनाया. इसने अमेरिका पर समुद्री डकैती जैसे आरोप लगाए और पाबंदी जारी रखने की बात कही.
आगे की रणनीति और संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस समय दोहरी रणनीति अपना रहा है. वह बातचीत के लिए तैयार दिखना चाहता है, लेकिन साथ ही दबाव बनाए रखना भी चाहता है. आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत हो सकती है. ऐसे में यह साफ है कि ईरान अपने अधिकारों पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है.
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