India at UNSC: 'एक ऐसा देश जो अपने लोगों पर गिराता है बम', भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को धोया
India at UNSC: हरीश ने कहा, 'दुर्भाग्यवश, हर साल हमें अपने देश के खिलाफ पाकिस्तान की भ्रामक बातें सुनने को मिलती हैं, खासकर जम्मू-कश्मीर के मामले में, जिस भारतीय क्षेत्र पर उनका कब्जा है.
India at UNSC: भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में पाकिस्तान कोे एक बार फिर से बेनकाब कर दिया. 'महिला, शांति और सुरक्षा' पर हुई खुली बहस में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि 'पाकिस्तान ऐसा देश है जो अपने ही नागरिकों पर बमबारी करता है और व्यवस्थित नरसंहार' की नीति अपनाता है.'
हरीश ने आगे कहा कि पाकिस्तान का मकसद सिर्फ दुनिया को गुमराह करना, भ्रम और झूठे आरोपों के जरिए ध्यान भटकाना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का महिला सुरक्षा और शांति के एजेंडे पर रिकॉर्ड पूरी तरह साफ और मजबूत है, जबकि पाकिस्तान लगातार दुष्प्रचार और अतिशयोक्ति के जरिए भ्रम फैलाने का प्रयास करता है.
'कश्मीरी महिलाओं पर यातनाएं'
उनकी यह टिप्पणी एक पाकिस्तानी अधिकारी के इस आरोप के तुरंत बाद आई कि कश्मीरी महिलाएं 'दशकों से यौन हिंसा सहन कर रही हैं'. हरीश ने कहा, 'दुर्भाग्यवश, हर साल हमें अपने देश के खिलाफ पाकिस्तान की भ्रामक बातें सुनने को मिलती हैं, खासकर जम्मू-कश्मीर के मामले में, जिस भारतीय क्षेत्र पर उनका कब्जा है. महिला, शांति और सुरक्षा के एजेंडे पर हमारा अग्रणी रिकॉर्ड बेदाग और अक्षुण्ण है.'
'अपने ही लोगों पर बम गिराता है'
उन्होंने पाकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा, 'जो देश अपने ही लोगों पर बम गिराता है, व्यवस्थित नरसंहार करता है, वह केवल गुमराह करने और अतिशयोक्ति से दुनिया का ध्यान भटकाने का प्रयास कर सकता है.' भारतीय दूत ने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसने 1971 में ऑपरेशन सर्चलाइट चलाया था और अपनी ही सेना द्वारा 400,000 महिला नागरिकों के नरसंहार और सामूहिक बलात्कार के 'व्यवस्थित अभियान' को मंजूरी दी थी. उन्होंने कहा, 'दुनिया पाकिस्तान के दुष्प्रचार को समझ रही है.'
साइमा सलीम की टिप्पणी
भारत की यह प्रतिक्रिया काउंसलर साइमा सलीम की टिप्पणी पर आई, जो संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी मिशन का हिस्सा हैं.अपनी टिप्पणी के दौरान, सलीम ने कश्मीरी महिलाओं की 'दुर्दशा' पर चर्चा की, जो 'कब्जे के दशकों से युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल की गई यौन हिंसा को सहन कर रही हैं.'
उन्होंने कहा, 'मानवाधिकार और विशेष प्रक्रियाओं के लिए उच्चायुक्त कार्यालय सहित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्रों ने एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और मेडिसिन्स सेन्स फ्रंटियर्स जैसे संगठनों के साथ मिलकर इन उल्लंघनों का दस्तावेजीकरण किया है.' उन्होंने आगे कहा कि दर्ज किए गए अपराधों में संरचनात्मक दंडमुक्ति, महिला मानवाधिकार रक्षकों और पत्रकारों का उत्पीड़न, गायब हुए लोगों के महिला परिवार के सदस्यों के खिलाफ प्रतिशोध, यातना और मनमाने ढंग से हिरासत में रखना, और यौन हिंसा और दुर्व्यवहार का व्यापक आघात शामिल है.
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