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बांग्लादेश में तख्तापलट से अटकीं सांसें, भारतीय कारोबारियों को सता रहा नुकसान का डर

बांग्लादेश के राजनीतिक हालात को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि अब कारोबारियों को नुकसान हो सकता है. इससे पहले भी पिछले तीन साल से बांग्लादेश और भारत के व्यापार में लगातार कमी आ रही है पिछले 3 सालों में इसमें लगभग 31 पर्सेंट की कमी आई है. देखा जा रहा है कि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता इस कदर हावी हो गई है कि यह भी तय नहीं है कि वहां का शासन राजनेता चलाएंगे कि सेना रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाएगी.

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बांग्लादेश में तख्तापलट से अटकीं सांसें, भारतीय कारोबारियों को सता रहा नुकसान का डर
Courtesy: Social Media

बांग्लादेश में अचानक हुए तख्तापलट ने भारतीय कारोबारियों की सांसें अटका दी हैं. भारत की दोस्त कही जाने वाली शेख हसीना के इस्तीफे के बाद भारत के निर्यातकों और आयातकों की चिंताएं बढ़ गई हैं. कारोबार का क्या होगा, जो पैसे नहीं मिल हैं वे कैसे मिलेंगे और धंधा किस हद तक जारी रहेगा इसको लेकर कारोबारी आशंकित हो गए हैं. म्यामांर का उदाहरण देखते हुए इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि बांग्लादेश में अब जल्द कुछ भी सामान्य नहीं होने जा रहा है. ऐसे में बांग्लादेश के साथ कारोबार करने वाले व्यापारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं.

लगातार हो रहे प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना ने सोमवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और भारत आ गईं. दूसरी तरफ, बांग्लादेश आर्थिक संकट से जूझ रहा है. महंगाई बढ़ने के कारण उसका अमेरिकी डॉलर रिसजर्व कमजोर हुआ जिसके चलते वह भारत से लोहा, स्टील, प्लास्टिक, बिजली और कृषि उत्पाद जैसी तमाम चीजें कम मात्रा में खरीद पा रहा है. बीते दो सालों में भारत से बांग्लादेश को होने वाले निर्यात में 31.5 पर्सेंट की कमी आई है. वहीं, बांग्लादेश से भारत को होने वाले आयात में 5.4 पर्सेंट की कमी आई है. साल दर साल इसमें लगातार कमी आती जा रही है.

लगातार कम होता गया कारोबार

साल 2022 में बांग्लादेश भारत से लगभग 1.34 लाख करोड़ का आयात कर रहा था. 2023 में यह घटकर 1.02 लाख करोड़ पर पहुंच गया और 2024 में सिर्फ 0.93 लाख करोड़ ही रह गया. इसका नतीजा यह हुआ है कि बांग्लादेश में आर्थिक गतिविधियां कम होती गईं और वहां महंगाई बढ़ती गई. बांग्लादेश में मसालों का आयात 42 पर्सेंट, चावल का आयात 54 पर्सेंट और कोयले और खनिज के आयात में 13 पर्सेंट की कमी आई है.

अब विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश के सभी राजनीतिक दल और अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी इस बात पर ध्यान दें कि कैसे भी करके सीमापार से होने वाला कारोबार प्रभावित न हो और देश के अंदर भी आर्थिक गतिविधियां जारी रहें. बता दें कि विदेशी मुद्रा कमाने के लिए बांग्लादेश का मुख्य स्रोत कपड़ों का कारोबार है. वह भारत जैसे दशों को कपड़े, धागे बेचता है. उसके निर्यात का 56 पर्सेंट हिस्सा इन्हीं चीजों से मिलकर बनता है. इन चीजों के लिए उसे साउथ एशियन फ्री ट्रेड एरिया (SAFTA) अग्रीमेंट का भी फायदा मिलता है जो भारत ने दे रखा है.

नुकसान की गारंटी!

दरअसल, शेख हसीना की सरकार भारत के साथ अच्छे रिश्तों और बेहतरीन दोस्ती के लिए मशहूर रही है. निजी स्तर पर भी शेख हसीना भारत के नेताओं से अच्छे ताल्लुक रखती रही हैं इसका असर दोनों देशों के कारोबार और आर्थिक पहलू पर भी दिखता रहा है. हालांकि, अब नए रिजीम में कारोबारियों के लिए मुश्किलें आने वाली हैं. ऐसा ही कुछ मालदीव और श्रीलंका के मामले में भी देखने को मिला था जब राजनीतिक अस्थिरता के चलते इन दोनों देशों में कारोबार करने वाले कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा था.