संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के संगठन डी-कंपनी को भारत-आधारित आपराधिक समूह बताए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है. भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट में मौजूद तथ्यों को गलत बताते हुए इसे गंभीर चूक करार दिया. भारत ने कहा कि ऐसी तथ्यात्मक गलतियां संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता और प्रभाव को नुकसान पहुंचाती हैं.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत का पक्ष रखा. यह प्रतिक्रिया आतंकवाद से मुकाबला करने और मानवाधिकारों व मौलिक स्वतंत्रताओं की रक्षा से संबंधित विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की रिपोर्ट के संदर्भ में दी गई.
रघु पुरी ने कहा कि भारत पहले भी अलग-अलग मंचों पर यह मुद्दा उठा चुका है कि विशेष प्रतिवेदक द्वारा तथ्यात्मक गलतियों वाली रिपोर्ट जारी करना और उसके लिए जवाबदेही तय नहीं होना स्वीकार्य स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसी गलतियां सदस्य देशों के सामने ऐसी स्थिति पैदा करती हैं, जिसे बाद में ठीक करना मुश्किल होता है.
पुरी ने विशेष रूप से उस हिस्से पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2003 में भारत-आधारित डी-कंपनी के नेता को अल-कायदा से संबंधों के कारण प्रतिबंध सूची में शामिल किया था. भारत के मुताबिक इस तरह की भाषा पूरे मामले की वास्तविक स्थिति को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं करती.
रघु पुरी ने कहा कि डी-कंपनी और उसका सूचीबद्ध सरगना दाऊद इब्राहिम 1993 से भारत में आतंकी हमलों के सिलसिले में वांटेड हैं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अल-कायदा प्रतिबंध व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि दाऊद को सूचीबद्ध किए जाने के कारणों में इस संबंध में स्पष्ट जानकारी दी गई है.
भारत ने कहा कि रिपोर्ट में इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया जाना बेहद खेदजनक है. पुरी ने कहा कि विशेष अधिकार प्राप्त लोगों की ओर से इस तरह की अक्षमता संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती है.
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि दाऊद इब्राहिम 2003 में संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल किए जाने से काफी पहले ही भारत से भाग चुका था. उनके अनुसार, देश से बाहर रहते हुए उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से जुड़े होने के कारण प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया था.
पुरी ने कहा कि दाऊद इब्राहिम भारत में वांछित अपराधी है और संयुक्त राष्ट्र की सूची में दी गई जानकारी के अनुसार वह पाकिस्तान में छिपा हुआ है. उन्होंने इस दौरान उस तथ्य की ओर भी इशारा किया कि अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन भी पाकिस्तान में ही मिला था.
अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी सेना ने 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में एक अभियान के दौरान मार गिराया था. भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में दाऊद इब्राहिम के संदर्भ में इसी तथ्य की ओर संकेत किया गया. भारत ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अधिकारियों की रिपोर्टिंग में तथ्यों की सटीकता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया. भारत का कहना है कि आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर किसी भी रिपोर्ट में तथ्यात्मक गलतियों की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए.