ईरान-अमेरिका जंग रोकने में भारत का बड़ा रोल! ओमान, तुर्की समेत ये 4 मुस्लिम देश भी बैक-चैनल में शामिल

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध रोकने के लिए बैक-चैनल बातचीत में भारत सक्रिय भूमिका निभा रहा है. ओमान, तुर्की, यूएई, सऊदी अरब और मिस्र समेत कई देश गुप्त संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए दुनिया की कूटनीति पूरी तरह सक्रिय हो गई है. ईरान और अमेरिका के बीच चल रही गुप्त बातचीत में भारत भी शामिल है. ओमान और तुर्की के अलावा भारत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और मिस्र के जरिए लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं. ट्रंप के 5-दिवसीय युद्ध विराम के ऐलान से ठीक पहले ये वार्ताएं तेज हुईं. कूटनीतिज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों ने युद्ध को और फैलने से रोका है.

भारत की अहम भूमिका

भारत, ईरान और अमेरिका दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध रखता है. इसी वजह से नई दिल्ली ने क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए संवाद के रास्ते खुले रखने में मदद की. भारतीय राजनयिकों ने दोनों पक्षों के बीच विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि इन गुप्त वार्ताओं का ट्रंप के फैसले पर कितना असर पड़ा, लेकिन इन प्रयासों ने सकारात्मक माहौल बनाया है.

चार मुस्लिम देश भी शामिल

ओमान लंबे समय से मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है. तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और मिस्र भी इस प्रक्रिया में सक्रिय हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार इन देशों के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच निरंतर कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है. ये देश पर्दे के पीछे मिलकर युद्ध को रोकने की कोशिश कर रहे हैं.

बैक-चैनल वार्ता का असर

युद्ध के चौथे सप्ताह में इतने सारे देश एक साथ वाशिंगटन और तेहरान के बीच की खाई पाटने में जुटे हैं. यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में देश कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं. इन वार्ताओं ने टकराव कम करने में ‘सुरक्षा वाल्व’ का काम किया है. आने वाले दिनों में इन कोशिशों के और तेज होने की उम्मीद है.

क्या है आगे का रास्ता

कूटनीतिज्ञों का कहना है कि ये गुप्त बातचीत युद्ध विराम को मजबूत बनाने में सहायक साबित होंगी. अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं. फिलहाल क्षेत्र में सैन्य तनाव बना हुआ है, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों से बड़ी उम्मीद जगी है कि दोनों पक्ष जल्द शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ सकते हैं.