अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद रिच मैककॉर्मिक ने भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने भारत को अपने से दूर किया, तो इसका नुकसान सिर्फ भारत को नहीं, बल्कि अमेरिका और पूरी दुनिया को हो सकता है. वॉशिंगटन डीसी में एक चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश समझदारी से साथ काम करें, तो आने वाले 100 साल तक शांति और समृद्धि लाई जा सकती है.
मैककॉर्मिक ने साफ शब्दों में कहा, “अगर अमेरिका भारत को दोस्त की तरह अपनाता है, तो शांति और विकास संभव है. लेकिन अगर भारत को अलग-थलग किया गया, तो यह सबके लिए बड़ी परेशानी बनेगा.” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व की भूमिका अभी खत्म नहीं हुई है.
"If America embraces Indians as friends, we will have peace and prosperity. If we alienate them, it is going to be big trouble for all of us," says US Congressman Rich McCormick at CSIS pic.twitter.com/AmWFWjb64N
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) January 16, 2026Also Read
उन्होंने चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना था कि अगर भारत और अमेरिका अलग-अलग दिशाओं में खिंच गए, तो यह दोनों देशों की साझेदारी और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने जोर दिया कि देशों को एक-दूसरे से दूर होने के बजाय साथ मिलकर सतर्क रहना चाहिए.
यह बातचीत सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) में हुई, जहां डेमोक्रेट सांसद एमी बेरा भी मौजूद थे. दोनों नेताओं ने माना कि भारत लंबे समय से अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार रहा है. एमी बेरा ने कहा कि भारत, अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति में अहम भूमिका निभाता है और चीन को लेकर दोनों देशों की सोच काफी हद तक एक जैसी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बोलते हुए मैककॉर्मिक ने उन्हें “सकारात्मक मायनों में बेहद राष्ट्रवादी” बताया. उन्होंने कहा कि मोदी अपने देश के हित को प्राथमिकता देते हैं, जैसे हर देश का नेता करता है. रूस से सस्ता तेल खरीदने के मुद्दे पर उन्होंने माना कि इससे अमेरिका को असहजता होती है, लेकिन भारत यह कदम अपने आर्थिक हित में उठा रहा है.
हालांकि, इस बयान के बाद MAGA समर्थकों की ओर से सोशल मीडिया पर तीखी और नकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं. कुछ यूजर्स ने भारत के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया, जबकि कुछ ने कहा कि अमेरिका ने भारत के साथ दोस्त की बजाय दबाव की तरह व्यवहार किया है. यह विवाद एक बार फिर दिखाता है कि भारत-अमेरिका रिश्ते रणनीतिक रूप से जितने मजबूत हैं, राजनीतिक स्तर पर उतने ही संवेदनशील भी हैं.