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India Daily

ईरान में न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा! IAEA ने किया चिंता करने वाला दावा, क्या कह रहे ईरानी अधिकारी?

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने ईरान के परमाणु नियामक अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की है. उन्होंने आगाह किया कि परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीति और बातचीत की मेज पर लौटना ही एकमात्र विकल्प है.

KanhaiyaaZee
ईरान में न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा! IAEA ने किया चिंता करने वाला दावा, क्या कह रहे ईरानी अधिकारी?
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों और बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वे ईरान के परमाणु नियामक अधिकारियों के साथ संचार बहाल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल दूसरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है. ग्रॉसी के अनुसार, ईरान में मौजूदा सैन्य गतिविधियों और तनाव के चलते ये महत्वपूर्ण संपर्क चैनल ठप पड़े हैं.

IAEA प्रमुख ने स्पष्ट किया कि परमाणु सुरक्षा की निगरानी और स्थिति की गंभीरता को समझने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है. ग्रॉसी ने उम्मीद जताई कि बातचीत का यह माध्यम जल्द से जल्द फिर से सक्रिय होगा. जानकारों का मानना है कि यदि परमाणु नियामक अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था के बीच संवाद का अभाव बना रहा, तो यह क्षेत्र में किसी बड़ी अनहोनी या परमाणु दुर्घटना की आशंका को जन्म दे सकता है.

अत्यधिक संयम बरतने की पुरजोर अपील 

क्षेत्र में तेजी से बदलते सैन्य समीकरणों को देखते हुए राफेल ग्रॉसी ने ईरान और संघर्ष में शामिल अन्य संबंधित पक्षों से 'अत्यंत संयम' बरतने की गुजारिश की है. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की सैन्य बढ़ोतरी न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को भंग करेगी, बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी एक गंभीर खतरा साबित होगी. ग्रॉसी ने दोहराया कि मौजूदा हालात में जंग की दिशा में बढ़ता हर कदम आत्मघाती हो सकता है और सभी पक्षों को ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए जो स्थिति को नियंत्रण से बाहर कर दे.

कूटनीति ही एकमात्र विकल्प 

ग्रॉसी ने जोर देते हुए कहा कि संघर्ष को और ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए अब वक्त आ गया है कि सभी पक्ष वापस कूटनीति और बातचीत की मेज पर लौटें. उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि हथियारों की होड़ और सैन्य कार्रवाई कभी भी स्थायी समाधान नहीं हो सकती. परमाणु सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों पर नजर रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पारदर्शी संवाद ही वह रास्ता है, जिससे और ज्यादा तनाव और तबाही को टाला जा सकता है.