नई दिल्ली: US लंबे समय से ईरान में सत्ता बदलने की कोशिश कर रहा है. अब खामेनेई की मौत के साथ ही अमेरिका की अपनी कठपुतली सरकार बनाने की कोशिशें कामयाब हो सकती हैं. इस तरह बहुत सी चीजें बदलने वाली हैं. US उम्मीद करेगा कि उसके सपोर्ट से सरकार बने.
ईरान में खामेनेई का 47 साल का राज खत्म हो गया है. उनकी की मौत के बाद उनके अकाउंट से एक आयत शेयर की गई. इसका मतलब है कि कुछ लोग अभी भी इंतजार कर रहे हैं और अल्लाह से किया अपना वादा पूरा करेंगे.
तेल और गैस की कीमतें बढ़ेंगी: इस युद्ध से दुनिया भर में कुछ समय के लिए एनर्जी का संकट पैदा हो जाएगा. पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसके अलावा बिजली की कीमतें भी बढ़ने की उम्मीद है.
महंगाई का खतरा: इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन, खाने-पीने की चीजों और दवाइयों पर पड़ता है. इन कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर हर देश पर पड़ेगा और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा.
पूरे मिडिल ईस्ट में संकट: अगर यह युद्ध फैलता है, तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ेगा. इसके संकेत तब से साफ हो गए हैं जब ईरान ने अकेले आठ देशों पर हमला किया था. ईरान के साथी हिज्बुल्लाह और हूती एक्टिव हो सकते हैं. इससे युद्ध इजराइल, लेबनान और यमन तक फैल सकता है.
US मिडिल ईस्ट में अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ाएगा: इन हालात से साफ है कि युद्ध तुरंत खत्म नहीं होगा और US को मिडिल ईस्ट में अपनी मौजूदगी बढ़ानी होगी. यह साफ है कि US को फिर से मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर सैनिकों को तैनात करना पड़ सकता है.
ईरान का न्यूक्लियर कैंपेन तेज होगा: US ने ईरान से लगातार न्यूक्लियर हथियार न बनाने की अपील की है. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि ईरान पर बहुत बड़ा हमला हुआ है. ऐसे में हो सकता है कि वह भविष्य में बचने की लड़ाई के लिए न्यूक्लियर हथियार बनाना शुरू कर दे. इससे उसे सुरक्षा का एहसास होगा.
रूस, चीन और भारत पर नजर: US और इजराइल इस लड़ाई में पूरी तरह शामिल हैं. मिडिल ईस्ट के कई मुस्लिम देश भी US को चुपचाप सपोर्ट दे रहे हैं. अब तक एशिया के तीन बड़े खिलाड़ी चीन, रूस और भारत ने इस लड़ाई से दूरी बनाए रखी है. इन तीनों देशों का रुख ही आगे की दिशा तय करेगा.
तेल सप्लाई में रुकावट का खतरा: अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो दुनिया के 20 प्रतिशत तेल व्यापार पर असर पड़ेगा. भारत पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा.
बाजार में गिरावट: भारत को लेकर सोमवार को शेयर बाजार पर नज़र रखने लायक होगी. तेल और एनर्जी से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है. युद्ध के डर से अक्सर निवेशक शेयर बाजार से पैसे निकाल लेते हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता पैदा होती है.
रिफ्यूजी संकट: ईरान और आस-पास के देशों से लाखों लोग यूरोप और एशिया भाग सकते हैं. इससे कई देशों में रिफ्यूजी संकट पैदा हो सकता है.
UN की साख अब बहुत कमजोर: यूनाइटेड नेशंस ने अक्सर कहा है कि सभी देशों की आजादी का सम्मान किया जाना चाहिए. इस मामले में यूनाइटेड स्टेट्स ने एक बार फिर इंटरनेशनल कानून तोड़ा है. लेकिन यूनाइटेड नेशंस बेअसर बना हुआ है. इस घटनाक्रम ने उसकी साख को भी खतरे में डाल दिया है.