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India Daily

अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा बनेंगे ईरान के नए सुप्रीम लीडर? किसी भी वक्त हो सकता है ऐलान

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का निधन हो गया. जिसके बाद अब नए राष्ट्रध्यक्ष के चुनाव की तैयारी की जा रही है. माना जा रहा है इस पद पर उनके बेटे को बिठाया जा सकता है.

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Edited By: Shanu Sharma
अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा बनेंगे ईरान के नए सुप्रीम लीडर? किसी भी वक्त हो सकता है ऐलान
Courtesy: X (@yo2thok, @ehsandkl)

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब इस पद को लेकर चर्चा तेज हो गई है. सभी के मन में यही सवाल है कि खामेनेई का उत्तराधिकारी किसे बनाया जाएगा. ईरानी मीडिया के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC अब नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति को लेकर जल्द फैसला चाहता है.

ईरानी मीडिया के मुताबिक IRGC के भीतर मौजूद शीर्ष कमांड स्ट्रक्चर सुप्रीम लीडर के नाम पर आज यानी रविवार तक मुहर लगाने देगी. कुछ मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस पद पर खामनेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ईरान का सर्वोच्च नेता बनाया जा सकता है. हालांकि इसे लेकर अभी तक कोई भी आधिकारी जानकारी नहीं दी गई है. 

कौन सुप्रीम लीडर का नाम करेगा फाइनल?

इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर के पूरे देश को अस्थिर कर दिया. हालांकि नियम के मुताबिक सुप्रीम लीडर के फैसले के बिना इस पद पर किसी को नहीं बिठाया जा सकता है. लेकिन खामेनेई के अचानक मौत होने की वजह से इसपर फैसला लेना मजबूरी बन गया है. हालांकि इसके लिए संवैधानिक संस्था या एक्सपर्ट असेंबली बैठक करेगी, लेकिन उथल-पुथल के माहौल में बैठक बुलाना भी संभव नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में यह प्रक्रिया जटिल हो गई है.

ईरानी लीडरों में डर का माहौल 

ईरान की संविधान की मानें तो सुप्रीम लीडर का नाम धार्मिक विद्वानों के ग्रुप वाली परिषद फाइनल करती है. यह सिस्टम ‘विलायत-ए-फकीह' पर आधारित है. जिसके मुताबिक केवल मौलवी को ही इस पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है. खामेनेई द्वारा अपने जीवन काल में इस नाम की घोषणा नहीं की गई थी, जिसके कारण अब यह काफी मुश्किल हो गया है. वहीं देश में असुरक्षा का माहौल है. कमांड चेन अब टूट चुके हैं, जिसके  कारण फील्ड स्तर तक फैसले पहुंचाने में परेशानी हो रही है.

कमांडरों को डर है कि इस चेन को मेंटन रखने पर इजरायल और अमेरिका द्वारा उनके ही सैन्य सेंटर्स को निशाना बनाया जाएगा. इसके अलावा देश के अंदर भी अशांति का माहौल है. अभी सुप्रीम लीडर का नाम तय तो नहीं है लेकिन जिसे भी इस पद की जिम्मेदारी दी जाती है, उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.