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ये 4 'महामारियां' कर रही हैं दुनिया का इंतजार, ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

स्टडी में कहा गया है कि इन वायरस में इबोला और माचुपो इंसानों के लिए सबसे बड़ा खतरा है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इन वायरल की पहचान 60 के दशक में हुई थी. तभी से ये वायरस तेजी से बढ़ रहे हैं. 

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Naresh Chaudhary
Pandemic, Ebola Marburg, SARS, Nipah, Machupo, Health News

हाइलाइट्स

  • चारों संक्रमणों की मृत्यु दर को देखकर वैज्ञानिक परेशान
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी जाई चिंता, फिर आ सकती है महामारी

Four Deadly Viruses Will Next Pandemic: दुनिया के देश अभी कोरोना की मार से उभर नहीं पाए हैं कि अब चार नए और बेहद खतरनाक वायरसों का हमला होने वाला है. दावा किया जा रहा है कि ये चार घातक वायरस अगली महामारी हो सकते हैं. हालांकि इनके लिए कोई समय या सीमा अभी निर्धारित नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इबोला, मारबर्ग, सार्स और निपाह आने वाले वक्त में बड़ी मुसीबत बन सकते हैं. 

न्यूज साइट टाइम्स नाउ ने ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के हवाले से कहा है कि इन वायरस से साल 2050 तक मौतें 12 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगी. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इन वायरस को अगली महामारी लाने के स्रोत के रूप में देखा है. स्टडी में कहा गया है कि इन वायरस में इबोला और माचुपो इंसानों के लिए सबसे बड़ा खतरा है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इन वायरल की पहचान 60 के दशक में हुई थी. तभी से ये वायरस तेजी से बढ़ रहे हैं. 

इबोला और मारबर्ग (Ebola and Marburg)  

इबोला और मारबर्ग दोनों संक्रमण वाले वायरस हैं. ये वायरल चमगादड़ों में पाए जाता है और उन्हीं से फैलता है. बताया जाता है कि अफ्रीका में कुछ साल पहले बड़े स्तर पर ये वायरल फैला था, जिसके कारण यहां काफी संख्या में लोगों की मौत हुई थी. 

स्टडी में साफ तौर पर कहा गया है कि संपर्क के साथ फैलने वाला ये घातक वायरल जल्दी ही पूरे विश्व में बड़े स्तर पर फैल सकता है. इस वायरस की सबसे खतरनाक बात ये है इससे संक्रमित इंसान को रक्तस्रावी बुखार (इंटरनल ब्लीडिंग) आता है. जो इंसानों के लिए एक दुर्लभ बुखार है. ये वायरल जानवरों से आता है और फिर इंसानों से इंसानों में फैलता है. विशेषज्ञों का दावा है कि इसमें औसत मृत्यु दर करीब 50 फीसदी है.

सार्स (SARS)

सार्स वायरल सांस से संबंधी संक्रमण है. ये वायरल कोविड-19 से पैदा हुआ है. वैज्ञानिकों का कहना है कि सार्स वायरस फेफड़ों में हवा के माध्यम से फैसला है और गंभीर रूप से प्रभावित करता है. इससे संक्रमित इंसान में फ्लू और सामान्य सर्दी बुखार यानी सिरदर्द, बुखार, शरीर में दर्द, खांसी और निमोनिया जैसे लक्षण होते हैं. 

ये वायरल हद से ज्यादा संक्रामक है. संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से इस दूसरे में फैलता है. दावा किया गया है कि सार्स पहली बार फरवरी 2003 में एशिया के कुछ देशों में पाया गया था, जिसके बाद ये तेजी के साथ फैला है. 

निपाह 

स्टडी रिपोर्ट्स के अनुसार निपाह वायरस भी चमगादड़ों के माध्यण से फैलता है. वैज्ञानिकों को डर है कि निपाह अगली सबसे बड़ी महामारी का भयानक हिस्सा बन सकता है. ये वायरस इंसानों के मस्तिष्क पर हमला करना है. इसके बाद सूजन पैदा होती है. इस वायरस की सबसे घातक बात ये है कि इसकी मृत्यु दर 75 फीसदी है. इसी साल केरल में निपाह वायरल के केस मिले थे, जिनमें से कई की मौत हो गई थी. 

माचुपो

माचुपो वायरस को ब्लैक टाइफस और बोलिवियाई भी कहते हैं. इससे पीड़ित इंसान को भी रक्तस्रावी बुखार (इंटरनल ब्लीडिंग) आता है. बताया गया है कि दक्षिण अमेरिका के बोलीविया में माचुपो को पहली बार 50 के दशक में खोजा गया था। ये वायरस चूहों के कारण फैलता है, जो अगली और बेहद घातक बीमारी हो सकता है. 

ये संक्रमण बुखार, अस्वस्थता, सिरदर्द आदि के साथ धीमी शुरुआत करता है. दावा किया गया है कि इसके लक्षण मलेरिया जैसे होते हैं. इसके बाद इंटरनल ब्लीडिंग वाला बुखार आता है. शुरुआत के 7 दिनों में ऊपरी शरीर पर खून के धब्बे फिर नाक और मसूड़ों से खून निकता है. इस संक्रमण के मरीजों की मृत्यु दर करीब 25 फीसदी है.