Pakistan Navy Fake Image: पाकिस्तानी नौसेना की फर्जी तस्वीर से झूठी ताकत का दावा, सच्चाई आई सामने

Pakistan Navy Fake Image: पाकिस्तानी नौसेना ने 2023 के चीन-पाक अभ्यास की पुरानी छवि को डिजिटल रूप से बदलकर, झूठे तरीके से अपने बेड़े की तैनाती का दावा किया.

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Ritu Sharma

Pakistan Navy Fake Image: भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में पाकिस्तान की ओर से गलत सूचना फैलाने की एक और कोशिश सामने आई है. इस बार निशाने पर है पाकिस्तानी नौसेना, जो अपनी युद्ध तैयारियों को साबित करने के लिए एक पुरानी और डिजिटल रूप से छेड़छाड़ की गई तस्वीर का इस्तेमाल करती पकड़ी गई है. यह तस्वीर हाल ही में ISPR (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) की प्रेस ब्रीफिंग में दिखाई गई थी और इसे नौसेना की 'त्वरित तैनाती' के सबूत के तौर पर पेश किया गया था.

पुरानी तस्वीर को नया बता कर गढ़ा गया प्रचार

पाकिस्तानी नौसेना के एक अधिकारी के मुताबिक, ''पनडुब्बियों, युद्धपोतों और नौसैनिक विमानों को तत्परता से तैनात किया गया है.'' लेकिन जो तस्वीर इस बयान के समर्थन में दिखाई गई, वो असल में 2023 के चीन-पाकिस्तान संयुक्त नौसैनिक अभ्यास की है. उस अभ्यास में हिंद महासागर में चीनी और पाकिस्तानी युद्धपोत गश्त करते नजर आए थे, साथ ही पाकिस्तान की नौसेना वायु सेना के तीन लॉकहीड मार्टिन P-3C ओरियन विमान भी आसमान में उड़ते दिखाई दिए थे.

नई तस्वीर में जोड़ी गई नकली पनडुब्बी

बता दें कि तथ्यों की जांच में सामने आया कि इस तस्वीर को डिजिटल रूप से बदला गया है. असली फोटो में कोई पनडुब्बी नहीं थी, लेकिन हालिया संस्करण में एक पनडुब्बी को जोड़ दिया गया है ताकि पाकिस्तान की ताकत ज्यादा दिखाई दे. इससे पाकिस्तान के बयान की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल उठ गया है.

पहले से प्रकाशित तस्वीर से हुआ खुलासा

वहीं दिसंबर 2023 में रेडियो पाकिस्तान ने एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें इस असली तस्वीर का उपयोग किया गया था. उसका टॉपिक था, ''नौसेना प्रमुख ने पाकिस्तानी नौसेना द्वारा परिचालन उद्देश्यों की उपलब्धियों की सराहना की.'' इसके अलावा, यूरेशियन टाइम्स के एक लेख में भी यही मूल तस्वीर देखी जा सकती है, जिससे यह साफ होता है कि नई तस्वीर बस उसी की डिजिटल कॉपी है जिसमें बदलाव कर दिखावा किया गया है.

फर्जी प्रचार की एक और मिसाल

बहरहाल, यह मामला पाकिस्तान के सैन्य दुष्प्रचार की एक और मिसाल बनकर सामने आया है, जिसने न केवल उसकी संचार रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख को भी झटका दिया है.