मृत पार्टी कार्यकर्ता को बीजेपी ने बना दिया पार्षद, फजीहत होने पर जिलाध्यक्ष ने कहा- यह मानवीय भूल

अयोध्या में पार्षदों के मनोनयन में बड़ी लापरवाही सामने आई है. सरकार ने खिरौनी नगर पंचायत से एक ऐसे दिवंगत कार्यकर्ता को मनोनीत कर दिया, जिनकी पांच महीने पहले ही मौत हो चुकी थी. इस चूक ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग द्वारा जारी की गई नामित पार्षदों की सूची ने अयोध्या में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. लंबे इंतजार के बाद प्रदेश के 761 नगर निकायों में 2,802 पार्षदों का मनोनयन हुआ, लेकिन अयोध्या की सूची ने सरकारी व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ जहां मृत व्यक्ति को पार्षद बनाया गया, वहीं दूसरी तरफ एक चर्चित गैंगरेप मामले की पैरोकार का नाम भी इसमें शामिल है, जिससे यह पूरी प्रक्रिया चर्चा का केंद्र बन गई है.

अयोध्या की खिरौनी नगर पंचायत से राजवंश पासी को पार्षद मनोनीत किया गया है. हैरानी की बात यह है कि राजवंश पासी की मृत्यु पिछले साल 23 नवंबर को ही ब्रेन स्ट्रोक की वजह से हो गई थी. वे बीजेपी अनुसूचित मोर्चा के मंडल अध्यक्ष थे. पांच महीने पहले दुनिया छोड़ चुके व्यक्ति को सार्वजनिक पद के लिए चुने जाने की खबर ने उनके परिवार और समर्थकों को गहरा झटका दिया है.

परिवार और सोशल मीडिया पर सवाल 

राजवंश के भाई पवन कुमार ने बताया कि निधन के समय क्षेत्रीय विधायक और कई बड़े नेता शोक जताने घर पहुंचे थे. ऐसे में परिवार यह समझ नहीं पा रहा कि विभाग के पास उनके निधन की जानकारी क्यों नहीं थी. सोशल मीडिया पर भी लोग तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि प्रशासन ने पुरानी सूचियों को बिना जांचे-परखे ही जारी कर दिया है, जिससे सरकार की फजीहत हुई है.

मंजू निषाद के नाम पर चर्चा 

इसी सूची में दूसरा चर्चित नाम मंजू निषाद का है, जो भदरसा की भारत कुंड नगर पंचायत में सहायक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं. मंजू निषाद भदरसा के बहुचर्चित गैंगरेप मामले में पीड़िता की मुख्य पैरोकार रही हैं. उनके मनोनयन ने जिले के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है. इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या यह निर्णय किसी विशेष सामाजिक रणनीति का हिस्सा है या महज एक प्रशासनिक संयोग.

बीजेपी जिला अध्यक्ष का स्पष्टीकरण 

इस भारी चूक पर अयोध्या के बीजेपी जिला अध्यक्ष राधेश्याम त्यागी ने इसे एक 'मानवीय भूल' करार दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजवंश पासी एक समर्पित और वरिष्ठ कार्यकर्ता थे और उनका नाम क्षेत्र में काफी सम्मान के साथ लिया जाता है. जिला अध्यक्ष के अनुसार, पार्टी अपने सभी कार्यकर्ताओं की जानकारी रखती है, लेकिन तकनीकी स्तर पर हुई इस गलती को जल्द ही सुधार लिया जाएगा.

उत्तर प्रदेश सरकार ने मई 2023 के निकाय चुनावों के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पार्षदों को नामित किया है. प्रदेश के नगर निकायों में कुल 2,802 सदस्यों को जगह दी गई है. इसमें 17 नगर निगमों में 170, नगर पालिकाओं में 1,000 और नगर पंचायतों में 1,632 सदस्यों का चयन हुआ है. हालांकि, अयोध्या जैसी घटनाओं ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और डेटा अपडेशन की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है.