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India Daily

140 साल बाद फिर मंडरा रहा ‘मेगा अल-नीनो’ का खतरा: भीषण गर्मी, सूखा और तबाही की चेतावनी!

El Nino के मजबूत होने से दुनिया में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2026-27 में मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव हो सकते हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
140 साल बाद फिर मंडरा रहा ‘मेगा अल-नीनो’ का खतरा: भीषण गर्मी, सूखा और तबाही की चेतावनी!
Courtesy: grok

प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्मी ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है. वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो इस बार बेहद शक्तिशाली रूप ले सकता है, जिससे 2026-27 में मौसम पर गहरा असर पड़ेगा. समुद्र में फैली लंबी गर्मी की लहर इस प्रक्रिया को और तेज कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर में तापमान, बारिश और कृषि पर व्यापक असर डाल सकता है.

मेगा अल-नीनो का बढ़ता खतरा

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार अल-नीनो सामान्य से कहीं ज्यादा ताकतवर बन सकता है. प्रशांत महासागर में हजारों किलोमीटर तक फैली गर्मी की लहर इस घटना को और मजबूत कर रही है. यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब इतिहास की ओर देखा जाए. 1877-78 का अल-नीनो दुनिया के सबसे विनाशकारी घटनाओं में गिना जाता है, जिसने भीषण सूखा और गर्मी फैलाई थी. अब विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाला अल-नीनो उसी स्तर तक पहुंच सकता है या उससे भी अधिक प्रभाव डाल सकता है.

दुनिया भर में संभावित असर

इस जलवायु बदलाव का असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिल सकता है. कई क्षेत्रों में सूखा और अत्यधिक गर्मी का खतरा बढ़ेगा, जबकि कुछ जगहों पर भारी बारिश और बाढ़ की संभावना बनेगी. ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और एशिया के कई हिस्सों में खेती प्रभावित हो सकती है. वहीं, अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा से हालात बिगड़ सकते हैं. कुल मिलाकर मौसम के पारंपरिक पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे जनजीवन पर गहरा असर पड़ेगा.

भारत पर क्या होगा असर

भारत में इस बार गर्मी का असर ज्यादा तीव्र हो सकता है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि तापमान सामान्य से अधिक रहेगा और कई क्षेत्रों में लू की स्थिति बनेगी. मानसून कमजोर पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे सूखे का खतरा बढ़ सकता है. इसका सीधा असर कृषि पर पड़ेगा और फसलों की पैदावार कम हो सकती है. इसके अलावा, बढ़ती नमी के कारण गर्मी और अधिक असहनीय महसूस हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.

तैयारी और सावधानी की जरूरत

इस संभावित संकट से निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों को तैयार रहने की जरूरत है. पानी के संरक्षण, सूखा प्रबंधन और कृषि में बदलाव जैसे कदम जरूरी होंगे. किसानों को ऐसी फसलें अपनाने की सलाह दी जा रही है, जो कम पानी में भी टिक सकें. स्वास्थ्य विभाग को भी गर्मी से बचाव के उपायों पर ध्यान देना होगा. वैज्ञानिक लगातार इस स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, ताकि समय रहते चेतावनी दी जा सके और नुकसान को कम किया जा सके.