India-US Tariff: रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच जारी खींचतान में अब एक नया मोड़ सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में कुछ राहत देने का फैसला किया है. इससे भारत के लिए भी उम्मीद जगी है, क्योंकि मॉस्को से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर नई दिल्ली को भारी टैरिफ लगाने की धमकियां मिलती रही हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या भारत को अब राहत मिल सकती है?
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद बढ़ाई, ताकि अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए उपलब्ध विकल्पों का लाभ उठा सके. अमेरिका की ओर से रूसी तेल की खरीद पर दबाव के बावजूद भारत ने अपने ऊर्जा हितों को प्राथमिकता दी है. अब प्रतिबंधों में नरमी से भारतीय तेल कंपनियों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा तेल खरीदने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है.
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका में सख्त टैरिफ प्रावधानों की चर्चा रही है. खबर में उल्लिखित लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 के तहत कुछ परिस्थितियों में 100 प्रतिशत और 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान बताया गया है.
अमेरिका में तीन नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वहां डीजल की कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थी. ईंधन महंगा होने से आम नागरिकों, किसानों और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है. ऐसे में घरेलू महंगाई को काबू में रखना ट्रंप प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.
अमेरिकी आदेश के तहत रूस से तेल और गैस की खरीद पर निगरानी जारी रखने की बात भी कही गई है. प्रतिबंधों में दी गई छूट की भविष्य में समीक्षा हो सकती है. इसलिए भारत को मिलने वाला वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन नियमों को किस तरह लागू करता है. रूसी तेल की खरीद आसान होने से भारतीय कंपनियों को मदद मिल सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत घट जाएंगी.