अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर एक बड़ा विकल्प तैयार किया जा रहा है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ईरान पर अपनी सबसे बड़ी गैर-परमाणु बम GBU-43/B Massive Ordnance Air Blast यानी MOAB के इस्तेमाल की संभावना पर विचार कर रहा है. इसे आमतौर पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु और ऊर्जा ढांचे को संभावित निशाना बनाने पर विचार कर रहा है. कार्रवाई अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले या उसके बाद हो सकती है. ट्रंप ने अमेरिकी सेना से ईरान में संभावित लक्ष्यों की सूची तैयार करने को कहा है. इस सूची में बड़ी संख्या में ऊर्जा से जुड़े ठिकाने शामिल होने की बात सामने आई है.
संभावित लक्ष्यों में ईरान का पिकैक्स माउंटेन भी शामिल बताया जा रहा है. यह जगह नतांज परमाणु परिसर के पास स्थित है और राजधानी तेहरान से करीब 225 किलोमीटर दक्षिण में है. ट्रंप पहले भी पिकैक्स माउंटेन को लेकर चेतावनी दे चुके हैं.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अगर MOAB का इस्तेमाल किया जाता है तो इसे पिकैक्स माउंटेन के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने की संभावना ज्यादा है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इतना बड़ा बम जमीन के काफी नीचे मौजूद ईरानी परमाणु ठिकानों को कितना नुकसान पहुंचा पाएगा.
MOAB अमेरिका का सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम है. इसका वजन करीब 9,800 किलोग्राम है. इसे GPS की मदद से लक्ष्य तक पहुंचाया जाता है और C-130 Hercules विमान से गिराया जाता है.
अमेरिका ने इसका पहला परीक्षण 2003 में किया था, लेकिन वास्तविक युद्ध में इसका इस्तेमाल पहली बार 2017 में अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में ISIS-K के खिलाफ किया गया था. उस हमले में आतंकियों के सुरंग और गुफा नेटवर्क को निशाना बनाया गया था. अमेरिकी कार्रवाई में बड़ी संख्या में ISIS-K आतंकियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी. हालांकि, स्थानीय रिपोर्टों में नागरिकों के हताहत होने और घरों के नष्ट होने का भी दावा किया गया था.
सबसे बड़ा सवाल MOAB की प्रभावशीलता को लेकर है. ईरान के कुछ परमाणु ठिकाने जमीन के काफी नीचे और मजबूत संरचनाओं में बनाए गए हैं. रिपोर्ट में अमेरिकी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि MOAB इतनी गहराई तक पहुंचकर हमला करने में सक्षम नहीं हो सकता.
ऐसे में बम का असर मुख्य रूप से सतह पर मौजूद ढांचों और आसपास के इलाकों पर हो सकता है. हालांकि, इसका भारी विस्फोट मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा करने में काफी प्रभावी हो सकता है. ईरान के खिलाफ ऐसी कार्रवाई अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन वास्तव में MOAB का इस्तेमाल करेगा या सैन्य दबाव बनाने के लिए इसकी संभावना पर विचार किया जा रहा है.