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ट्रंप ने युद्ध खत्म करने का पुतिन का प्रस्ताव ठुकराया, ईरानी यूरेनियम रूस में शिफ्ट करने का था प्लान

पुतिन ने इस हफ्ते ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत में युद्ध को खत्म करने का एक प्रस्ताव रखा था. इस प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकरा दिया...

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
ट्रंप ने युद्ध खत्म करने का पुतिन का प्रस्ताव ठुकराया, ईरानी यूरेनियम रूस में शिफ्ट करने का था प्लान
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई बातचीत. इस बातचीत में ट्रंप ने पुतिन के एक ऐसे प्रस्ताव को ठूकरा दिया, जिससे ईरान युद्ध खत्म हो सकता था. इस प्रस्ताव में रूस एक अहम भूमिका निभाता हुआ दिखाई देता, लेकिन ट्रंप ने इससे साफ इनकार कर दिया. इस प्रस्ताव में एक समझौते के तहत ईरान के संवर्धित यूरेनियम को रूस भेजने की बात कही गई थी. सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति ने इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप के साथ हुई बातचीत के दौरान रखा था.

पुतिन का प्रस्ताव

ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत के दौरान पुतिन ने सुझाव दिया कि ईरान के पास जमा एनरिच्ड यूरेनियम को रूस भेज दिया जाए. इस प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकरा दिया. रिपोर्ट के अनुसार, रूस को इस यूरेनियम के लिए एक संभावित जगह माना गया था. यह उन गिने-चुने परमाणु-सशस्त्र देशों में से एक है जिनके पास ऐसी सामग्री को सुरक्षित रूप से रखने की तकनीकी क्षमता है.

रूस की तकनीकी क्षमता

रूस ने पहले भी 2015 के ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन के तहत ईरान के कम-एनरिच्ड यूरेनियम को अपने यहां रखा था. रिपोर्ट से पता चलता है कि यह प्रस्ताव पूरी तरह से नया नहीं था. रूस ने मई में अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता के दौरान और साथ ही मौजूदा संघर्ष शुरू होने से कुछ हफ़्ते पहले भी, इसी तरह के विचार रखे थे.

ईरान का परमाणु कार्यक्रम

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर चिंताएं हैं. तेहरान यूरेनियम एनरिचमेंट के ऐसे स्तरों के करीब पहुंच रहा है जो 60 प्रतिशत से भी ज्यादा है. एनरिचमेंट के इस स्तर का इस्तेमाल परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें बनाने के लिए किया जा सकता है. ऐसी क्षमताएं जो संभावित रूप से यूरोप तक पहुंच सकती है.

मिडिल ईस्ट में तनाव

इस बीच मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है. युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है. कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका भी जताई जा रही है.